भारत ने मौना किआ स्थित बिग आइलेंड के 30 मीटर के टेलिस्कॉप वाली परियोजना टीएमटी में पूर्ण भागीदार बनने की ओर कदम बढ़ाते हुए एक पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होने का प्रस्ताव स्वीकार किया है. टीएमटी अगली पीढ़ी की खगोलीय वैधशाला है जो 2018 में कार्यरत हो जाएगी. इसका 77 लाख डॉलर के डिजाइन-विकास के पहले चरण का काम पूरा हो गया है. अगले चरण में 200 मिलियन का निर्माण कार्य शुरू होना है.
2008 में जापान की नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल वेधशाला खगोल विज्ञान में अनुसंधान के लिए बनी इस परियोजना में एक सहयोगी के रूप में शामिल हुई थी. इस अनुसंधान में कनाडा के विश्वविद्यालयों के संघ की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भी है. उधर 2009 में चीन की राष्ट्रीय खगोलीय वेधशालाओं की विज्ञान अकादमी भी एक पर्यवेक्षक के रूप में टीएमटी शामिल हुई थी. अब भारत भी इसका एक हिस्सा है.
टीएमटी बोर्ड के अध्यक्ष व सांता बारबरा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के चांसलर हेनरी यांग ने कहा है कि भारत बुनियादी अनुसंधान के क्षेत्र में मान्यता प्राप्त व शीर्ष क्रम देशों के में शामिल हैं. टीएमटी के हिस्से के रूप में भारत खगोलीय अनुसंधान के अगली पीढ़ी का एक अभिन्न हिस्सा होगा. हम इस रोमांचक परियोजना पर उनके सहयोग का स्वागत करते हैं.

