शराब की लत व्यक्ति के स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और परिवार के लिए काफी नुकसानदेह साबित होती है. शराब की लत से ग्रस्त व्यक्ति के लिए उससे छुटकारा पाना काफी कठीन हो सकता है. परंतु अब एक नई तकनीक ने भविष्य के लिए उम्मीद जगाई है. जनरल ऑफ एक्सपेरिमेंटल मेडिसिन की खबर के अनुसार रोकफैलर विश्वविद्यालय की एन शेफर और पॉल ग्रीनगार्ड ने शोध की है कि कुछ विशेष माइक्रोआरएनए को सम्पादित कर देने से कौकेन के सेवन की ईच्छा को कम किया जा सकता है.
इस जोड़ी ने कुछ चूहों के ऊपर एक परीक्षण किया. उन्होनें कौकेन के आदि हो चुके कुछ ऐसे चूहों को कौकेन दिया जिनके शरीर के न्यूरोन में Ago2 प्रोटीन कम कर दिया गया था जो कि कुछ विशेष माइक्रोआरएनए के लिए आवश्यक होता है. उन्होनें पाया कि इससे चूहों ने कम मात्रा में कौकेन का सेवन किया.
Ago2 पर आधारित कुल 24 माइक्रोआरएनए होते हैं. जब कौकेन जैसे किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया जाता है तो इन आरएनए के सक्रीयता बढ जाती है. इन्हीं में से कुछ माइक्रोआरएनए ऐसे होते हैं जो कौकेन की लत लगा देते हैं. यदि इन माइक्रोआरएनए के सक्रीय रूप से कार्य करने के लिए उपयोगी प्रोटीन Ago2 की मात्रा कम कर दी जाए तो इससे नशीले पदार्थों के सेवन की ईच्छा भी कम हो जाती है.
परंतु अभी इस पर और शोध की जानी बाकी है. जैसे कि ऐसे कुल 24 माइक्रोआरएनए में से उन माइक्रोआरएनए का पता लगाना जो कि वास्तव में नशीले पदार्थों की लत के लिए जिम्मेदार होते हैं और उनके सम्पादन के अन्य सभी रास्ते खोजना. इसके बाद इस बात का परीक्षण भी किया जाएगा कि क्या चूहों की तरह मानव मस्तिष्क पर भी इसका असर पडता है?

