कांस्य युग के दौरान यानी करीब 4000 वर्ष पहले मृत्यु को प्राप्त हुए एक योद्धा को आज आप फिर से बोलते और भावनाएँ प्रगट करते देख सकते हैं. उसमें प्राणों को संचार नहीं हुआ है परंतु आधुनिक तकनीकों की मदद से उसके चेहरे को फिर से बना दिया गया है और उसे आवाज़ भी प्रदान कर दी गई है. कांस्य युग के इस व्यक्ति का कंकाल 1834 में फैली के पास ग्रिस्थोर्प नामक जगह पर मिला था. उस समय उसे होर्स ग्लू में उबाल कर सुरक्षित रखा ग्या था. 2006 तक यह कंकार रोटुंडा संग्रहालय में रखा गया था परंतु बाद में ब्राडफोर्ड विश्वविद्यालय के आर्कियोलोजिकल साइंस विभाग में भेज दिया गया जहाँ इसकी गहन जाँच की गई.
जाँच कर रहे दल के प्रमुख डॉ. एलान ओडेन को विचार आया कि क्यों ना इस मृत व्यक्ति के चेहरे को फिर से बनाया जाए. उन्होनें एक डेंटिस्ट और एक ओस्टियोलोजिस्ट की सहायता ली और उस व्यक्ति के चेहरे को फिर से तैयार किया. यही नहीं अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से उस चेहरे को एनिमेट भी किया गया और आवाज़ भी दे दी गई.
जाँच दल का अनुमान है कि यह व्यक्ति योद्धा था और जरूर किसी गुट का सेनाप्रमुख रहा होगा. अब इस मॉडल को फिर से उसके घर यानी रोटुंडा संग्रहालय भेज दिया गया है. अब इस संग्रहालय की मुलाकात लेने वाले लोग उसके कंकाल को नहीं बल्कि स्वयं उसे चेहरा हिलाते और बात करते देखते हैं. यह एक अलग ही अनुभव है.
अब 4000 वर्ष मृत्यु को प्राप्त हो चुका एक व्यक्ति लोगों से बात कर रहा है. पर वह निष्प्राण है.

