दूसरे जीवों को अपना आहार बनाने वाले कई प्राणी अपने शिकार की खोज में जूटे रहते हैं परंतु कुछ जीव ऐसे होते हैं जो शिकार की खोज नहीं करते बल्कि उसके आने का इंतजार करते रहते हैं, जैसे ही वह उनके पास आता है वे उस पर हमला कर देते हैं. ये दोनों एकदम अलग व्यवहार है और इसका विज्ञान शायद दिमाग के कद पर आधारित है.एक नई शोध से पता चला है कि मछलियों के दिमाग का कद यह तय करता है कि वे शिकार करने जाएंगी या शिकार का इंतजार करेंगी. यूनिवर्सिटी ऑफ ग्वेल्फ के प्रो. रोब मैकलोगलिन ने अपनी शोध के दौरान देखा कि मछली के दिमाग के एक विशेष हिस्से का कद उसकी शिकार करने की आदत को निर्धारित करता है.
प्रो. मैकलोगलिन के अनुसार जिस मछली के दिमाग का टेलेनसेफलोंस क्षैत्र बडा होता है वह अपने शिकार की खोज में जाती है, परंतु जिस मछली का टेलेनसेफलोंस का कद छोटा होता है वह अपने शिकार का इंतजार करती रहती है. टेलेनसेफलोंस वह क्षैत्र होता है जो मछली की गतिविधि और आसपास के क्षैत्र के इस्तेमाल की आदत को तय करता है. इसी क्षैत्र की वजह से मछली अलग अलग स्थानों पर तैर कर चली जाती है और मार्ग भटकती नहीं. उसमें खतरा मोल लेने की हिम्मत आ जाती है और एकाग्रता भी बढती है.
जर्नल बिहेवीयर इकोलोजी एंड सोसियोलोजी में छपी शोध रिपोर्ट के अनुसार कनाडा की क्रेडिट रीवर से दो अलग अलग प्रकार की मछलियों को लेकर उनके दिमाग का परीक्षण किया गया. परीक्षण के दौरान यह देखा गया कि उनके दिमाग के ओल्फैक्टरी बल्ब तथा टेलेनसेफलोंस का माप क्या है. शोध से पता चला कि एक ही माप के ओल्फैक्ट्री बल्ब वाली दोनों मछलियों का शिकार करने का व्यवहार अलग अलग था क्योंकि दोनों के टेलेंसेफलोंस का माप अलग था, और इससे गतिविधि से संबंधित उनका व्यवहार प्रभावित हो रहा था.

