इस खोज को न्यूरोविज्ञान के क्षेत्र में हुई एक बडी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है. कनाडा के वैज्ञानिकों ने दिमाग के कोषों को सिलिकोन चिप के साथ जोडने में सफलता अर्जित की है और इससे दिमाग के कोषों का अध्ययन करना काफी सरल हो गया है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगारी की चिकित्सा शाखा के नावेद सईद और उनकी टीम ने इस तकनीक को विकसित किया है. यह न्यूरोचिप दिमाग के कोषों के बीच नेटवर्क स्थापित करती है और इससे दिमाग के कोषों की गतिविधियाँ रिकार्ड की जा सकती है, वह उस रिजोल्यूशन पर जो पहले कभी सम्भव नहीं हुआ था.
इस न्यूरोचिप की मदद से यह जानना आसान हो गया है कि सामान्य परिस्थितियो मे दिमाग के कोष किस तरह से काम करते हैं और इससे अल्ज़ायमर और लकवे की शिकायत का इलाज करने में मदद मिलने की सम्भावना है.
इस बारे में नावेद सईद का कहना है कि - अब हम दिमाग की गतिविधियों पर बारिकी से नज़र रख सकते हैं. दिमाग के आयन चैनल का अभ्यास करना काफी सरल हो गया है और इससे न्यूरो-डिजनरेटेड बिमारियों का इलाज और भी अच्छी तरह से किया जा सकेगा. इससे पहले दिमाग के आयन चैनल का अभ्यास करने का प्रशिक्षण देने में वर्षों बीत जाते थे और उसके बाद भी एक या दो कोषों का ही एक बार में अभ्यास किया जा सकता था. परंतु अब कोषों के एक बडे नेटवर्क को चिप के साथ जोड़ कर बारीक से बारीक जाँच की जा सकती है और इससे असंख्य दिमागी कोषों का अध्ययन सरल हो गया है.
इस खोज से उत्साहित यूनिवर्सिटी ऑफ केलगारी के अध्यक्ष रोज गोल्डस्मीथ का मानना है कि इस खोज से होने वाले लाभों का अनुमान लगाना ही असम्भव है. इस खोज ने साबित कर दिया है कि न्यूरोविज्ञान के क्षेत्र में कनाडा कितना है.

