समानव अंतरिक्ष अभियानों को लेकर दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसियों में होड़ सी मची है. एक लम्बे काल के बाद एक बार फिर चन्द्रमा और मंगल पर मानव अभियान भेजने की बात की जा रही है. आगामी कुछ वर्षों में मंगल ग्रह पर मानव अभियान भेजा जा सकता है. नासा ने इसके लिए एक कार्यक्रम भी तय कर रखा है. मंगल अभियान चुँकि काफी खर्चीला साबित होगा इसलिए नासा सहित अन्य स्पेस एजेंसियाँ भी चाहेंगी कि वहाँ पर गए अंतरिक्षयात्री कुछ दिन तक रहकर प्रयोग करें. परंतु मंगल ग्रह पर जाने वाले अंतरिक्षयात्री रहेंगे कहाँ? इसका जवाब मंगल ग्रह की ज्वालामुखियों में निहित है. विशेषज्ञों का मानना है कि मंगल की ज्वालामुखियों के लावे की वजह से बनी प्राचीन गुफाएँ अंतरिक्षयात्रियों का घर बन सकती है. नासा के एम्स रिसर्च सेंटर के काज विलियम्स के अनुसार कम से कम दो ऐसे स्थानों की पहचान कर ली गई है जहाँ अंतरिक्षयात्री रह सकते हैं. ये स्थान हैं थार्सिस राइज़ और एलिसियम राइज़.
नासा के अभ्यास के अनुसार ज्वालामुखी लावे से बनी इन गुफाओं में बर्फ के रूप में काफी मात्रा में पानी जमा है और यह पानी लम्बे काल तक स्थायी रहने वाला है. इससे वहाँ रहने वाले अंतरिक्षयात्रियों को काफी सुविधा होगी.
कैसे बनी ये गुफाएँ:
मंगल ग्रह पर ज्वालामुखी फटते रहते हैं. इनमें से निकलने वाला लावा लम्बे काल के बाद सुखकर गुफा की शक्ल ले लेता है. मंगल ग्रह पर लावाजन्य अनेकों गुफाएँ हैं. ये गुफाएँ कुछ इस तरह से बनी है कि मंगल ग्रह के दिन के समय गर्म हवाएँ इनके अंदर प्रवेश नहीं कर पाती और इस तरह से बर्फ पिघलने से बच जाती है. रात में जब बाहरी वातावरण अत्यधिक ठंडा हो जाता है तब ठंडी हवाएँ गुफाओं में प्रवेश कर जाती है और बर्फ के कणों को फिर से दिवारों तक समेट लेती है, इससे जो बर्फ उखड़ रही होती है वह फिर से जम जाती है.
यह बर्फ अगले 1 लाख वर्षों तक यूँ ही जमी रहेगी ऐसा अनुमान है. इससे अंतरिक्षयात्रियों के लिए ये गुफाएँ एक आरामदायक घर बन जाएंगे. और इन गुफाओं में रहने वाले यात्री शायद कैवनॉट्स के नाम से जाने जाएंगे.

