अंतरीक्ष में लम्बे काल तक रहने वाले अंतरिक्षयात्रियों को कई प्रकार की विषमताओं का सामना करना पड़ता है और और इसका उनके स्वास्थ्य पर भी असर पडता है. परंतु एक नई शोध से प्राप्त जानकारी के बाद लम्बे काल के लिए अंतरीक्ष में लोगों को भेजने के अभियानों पर सवाल खडा हो गया है. अमेरिकी शोधकर्ताओं ने कुछ अंतरिक्षयात्रियों की जाँच के बाद पाया कि अंतरिक्ष में महिनों गुजारने के बाद वे 80 वर्ष के बुजुर्ग की तरह हो जाते हैं.शोधकर्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में महिने गुजारने वाले कुछ अंतरिक्षयात्रियों के स्नायूओं का अभ्यास करने बाद यह जाँच रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार अंतरिक्ष में 6 महिने गुजारने वाले अंतरिक्षयात्री का शारीरिक श्रम करने की क्षमता 40% तक कम हो जाती है. जनरल ऑफ फिजियोलोजी में प्रकाशित शोध रिपोर्ट में लिखा गया है कि 30 से 50 वर्ष आयु के अंतरिक्षयात्रियों की शारीरिक क्षमता 80 वर्षीय बुजुर्ग की तरह हो जाती है.
हालाँकि अंतरिक्षयात्री अंतरिक्ष में जाने से पहले गहन प्रशिक्षण के दौर से गुजरते हैं. अंतरिक्ष में विशेष कपड़े पहने रखते हैं और नियमित कसरत भी करते हैं. इसके लिए स्पेस स्टेशन में एक जिम भी बनाई गई है जहाँ ट्रेडमील और साइकल रखी गई है. परंतु फिर भी इनका कोई विशेष सकारात्मक प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है.
ऐसा क्यों होता है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष में लम्बे काल तक भारहीन अवस्था में रहने की वजह से शरीर में फाइबर दल की कमी हो जाती है. इससे ताकत और ऊर्जा कम होने लगती है. हड्डियाँ कमजोर हो जाती है और स्नायू ढीले पड़ने लगते हैं.
वैज्ञानिकों को डर है कि इसकी वजह से भविष्य की अंतरिक्षयात्राओं पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा. क्योंकि स्पेस स्टेशन में 6 महिने बिताने वाले अंतरिक्षयात्रियों का शरीर जिस अनुपात में कमजोर हुआ है उसे देखते हुए मंगल तक समानव अंतरिक्षयात्रा असम्भव ही लगने लगती है. मंगल ग्रह तक पहुँचने में ही 8 महिने का समय लगने वाला है. उसके बाद अंतरिक्षयात्री कम से कम 1 वर्ष तक वहाँ रहेंगे. इस तरह से पूरा मिशन करीब 3 साल का हो जाता है.
हाल की परिस्थितियों में तो यह असम्भव मिशन बन जाता है क्योंकि 3 साल लगातार अंतरिक्ष में रहने के बाद तो अंतरिक्षयात्री हिलने डुलने के भी काबिल नहीं रहेंगे.

