भारत के पहले चन्द्र अभियान चन्द्रयान-1 से प्राप्त हुए भारी भरकम आँकडों तक अब आम लोगों की पहुँच भी होगी. लोग चन्द्रयान से प्राप्त जानकारियों को पढ पाएंगे और चन्द्रयान पर लगे उपकरणों द्वारा खिंची गई चन्द्रमा की हजारों तस्वीरों को देख पाएंगे.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानी इसरो इस वर्ष के अंत तक एक विशेष वेब पोर्टल के माध्यम से चन्द्रमा से जुड़ी जानकारियाँ ओनलाइन करने जा रहा है. यह कार्य दो चरणों में किया जाएगा. पहले चरण में नवम्बर 2008 से लेकर फरवरी 2009 तक के आँकडे ओनलाइन किए जाएंगे और दूसरे चरण में मार्च 2009 से लेकर अगस्त 2009 तक के आँकडे.
पहले चरण में करीब 26 गीगाबाइट सामग्री अपलोड की जाएगी. इसमें चन्द्रमा की रसायनिक मैपिंग, हाई रिजोल्यूशन तस्वीरें, हाई रिजोल्यूशन त्रिआयामी मैपिंग और सतह की जानकारियाँ अपलोड की जाएगी. यह सामग्रियाँ ओनलाइन तो उपलब्ध होंगी ही, इसके साथ ही इसरो विभिन्न विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों तक इन जानकारियों की पहुँच भी सुलभ बनाएगा ताकी इस क्षैत्र में हो रही शोधों को मदद मिल सके.
चन्द्रयान से प्राप्त जानकारियों के रखरखाव व विश्लेषण के लिए इसरो अमेरीका की अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था नासा के द्वरा विकसित प्लेनेटरी प्रिज़र्वेशन सिस्टम का उपयोग कर रहा है. चन्द्रयान अभियान से चन्द्रमा की करीब 70,000 तस्वीरें प्राप्त हुई थी, जिनका विश्लेषण किया गया है.
भारत ने चन्द्रमा का अध्ययन करने के लिए 22 अक्टूबर 2008 को पीएसएलवी रॉकेट के माध्यम से चन्द्रयान-1 उपग्रह को प्रक्षेपित किया था. इस उपग्रह में 11 उपकरण लगे थे जिनमें से 5 स्वदेशी. पूरा अभियान 2 वर्ष तक चलना था परंतु प्रक्षेपण के 10 महिनों के बाद चन्द्रयान-1 उपग्रह से सम्पर्क टूट गया था. परंतु इससे पहले इस अभियान का 80% हिस्सा पूरा हो चुका था.
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