Wednesday, May 23rd

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

धरती से दूर एक जहाँ और भी है, अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के 10 साल

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issआज दुनिया उस जगह का जन्मदिन मना रही है, जहाँ इंसान पिछले 10 वर्षों से रह रहा है और वह जगह धरती से दूर अंतरिक्ष में है. यह अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन है जिसे दुनिया ने मिलकर बनाया है और जहाँ दुनिया भर की स्पेस एंजेसियों के द्वारा भेजे गए अंतरिक्षयात्री रह चुके हैं.


धरती से 300 किलोमीटर दूर यह पहली ऐसी जगह है जहाँ मानव ने धरती के बाद सबसे अधिक समय व्यतीत किया है. अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन दुनियाभर की अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसियों का एक साझा प्रयास है जिसकी वजह से कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए जा सके हैं. एक अनुमान के अनुसार उस स्पेस स्टेशन पर अब तक करीब 600 प्रयोग किए जा चुके हैं.

इसकी शुरूआत हुई थी 2 नवम्बर 2000 को जब 1 अमेरिकी और 1 रूसी अंतरिक्षयात्री ने इस स्पेस स्टेशन के भीतर कदम रखा था. उसी के साथ मानो शीतयुद्ध की यादों को भूला दिया गया. हालाँकि इसकी शुरूआत काफी पहले ही हो गई थी. शीतयुद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिकी और रूसी राजनेताओं और अधिकारियों ने आपसी मेलजोल बढाने को महत्व देना शुरू किया और इससे विज्ञान जगत को काफी लाभ पहुँचा. अंतरिक्ष के क्षैत्र में सहयोग बढाने को लेकर समझौते हुए और पहले अमेरिकी अंतरिक्षयात्री ने रूस के मीर स्पेस स्टेशन पर कदम रखा.

इसके बाद एक अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन स्थापित करने का विचार प्रस्तुत किया गया और दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों से सहयोग मिलना शुरू हुआ. इस प्रोजेक्ट में भारत और चीन की स्पेस एजेंसियों को छोड़कर लगभग बाकी सभी बडी स्पेस एजेंसियाँ शामिल हैं. दुनिया भर के लगभग 15 देशों ने इस स्पेस स्टेशन को बनाने में मदद की है.

स्पेस स्टेशन को अंतर्राष्ट्रीय रूप देने का विचार इसलिए भी आया क्योंकि यह काफी खर्चीला प्रोजेक्ट है. इससे पहले रूस अपने लिए मीर-2 प्रोजेक्ट तैयार कर चुका था. अमेरिका भी फ्रीडम नामक स्पेस स्टेशन बनाने वाला था और इसी तरह से यूरोपीयन यूनियन कोलम्बस और जापान किबो नामक स्पेस स्टेशन बनाने वाले थे. परंतु भारी भरकम खर्च को ध्यान में रखते हुए इन सभी देशों ने आपसी सहयोग के द्वारा एक एकीकृत स्पेस स्टेशन बनाने का विचार प्रस्तुत किया.

1998 में रूस के ज़्यारा मोड्यूल ने स्पेस स्टेशन के पहले कोम्पोनेंट को अंतरिक्ष में स्थापित किया. परंतु उसके बाद लगभग सारे भारी कोम्पोनेंट अमेरिकी स्पेस शटल के माध्यम से ही पहुँचाए गए, क्योंकि मात्र अमेरिकी अंतरिक्ष यान ही इतने भारी कोम्पोनेंट को स्पेस स्टेशन तक ले जाने में सक्षम थे. और इसके लिए नासा के पास पर्याप्त फंड भी था.

इस स्टेशन पर रहने वाले पहले यात्री थे रूस के यूरी गिजेंको और सर्जेई कर्कालेव तथा अमेरिका के बिल शेफर्ड. इसके बाद लगातार अंतरिक्षयात्रियों के आने और जाने का सिलसिला चलता रहा जो आज भी जारी है. अब तक लगभग 200 अंतरिक्षयात्री इस स्पेस स्टेशन की मुलाकात ले चुके हैं.

पिछले वर्ष इस स्टेशन पर स्थाई रूप से रहने वाले अंतरिक्षयात्रियों की संख्या बढाकर 6 कर दी गई थी. ऐसा पहली बार हुआ जब इस प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी बडी स्पेस एजेंसियो जैसे कि अमेरिका की नासा, रूस की स्पेस एजेंसी, यूरोपीयन स्पेस एजेंसी, जापान की जाक्सा और कनाडा की स्पेस एजेंसी के प्रतिनिधि इस स्पेस स्टेशन पर एक साथ रहे.

कैसा है यह स्पेस स्टेशन?

अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन करीब करीब एक फुटबॉल के मैदान जितना बडा है. इसके अंदर रहने की जगह करीब 5 कमरे के घर जितनी बडी है. यहाँ सभी सुविधाएँ उपलब्ध है. इस स्पेस स्टेशन का निर्माण कार्य 1998 में शुरू हुआ था जो अब तक जारी है. इस स्पेस स्टेशन पर हर वर्ष कोई ना कोई नया कोम्पोनेंट जोड दिया जाता है. उम्मीद है कि 2011 तक यह स्टेशन अपना पूर्ण आकार ले लेगा. इसके बाद यह करीब 10 वर्ष तक और काम करेगा.

आईएसएस एक तरह का उपग्रह ही है. वास्तव में यह धरती से छोडा गया, और अंतरिक्ष में तैयार किया गया सबसे बडा उपग्रह है.

तथ्य:

  • द्रव्यमान:     303,663 कि.ग्रा
  • लंबाई:     73 मीट
  • चौड़ाई:     108.5 मीटर
  • वायुमंडलीय दबाव: 101.3 कि.पा.
  • पेरिजी (भू-समीपक): 343 कि.मी
  • एपॉजी (शिरोबिंदु): 351 कि.मी
  • कक्षा का झुकाव: 51.6419 डिगरी
  • औसत गति:     27,743.8 कि.मी/घंटा

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