तेज और आक्रामक संगीत आजकल युवाओं और किशोरों की पहली पसंद बनता जा रहा है. विभिन्न रॉक बैंडों और एल्बमों के द्वारा प्रस्तुत गानों के बोल भी काफी आक्रामक होते हैं. यही नहीं हाल ही में रिलीज हुई कई फिल्मों के गीत भी काफी शोरगुल भरे और आक्रामक हैं. ये गीत सुनने में भले ही अच्छे लगते हों लेकिन इनका असर काफी घातक सिद्ध हो सकता है.एक शोध के अनुसार आक्रामक भाषा, असभ्य शब्द, और महिलाओं के लिए अपमानजनक शब्दों से भरे गीत युवकों में आक्रामकता को बढावा देते हैं और इससे वे अपराध करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं. डॉ. वेन वारबर्ट के अनुसार हमारा दिमाग विषयवस्तु के आधार पर हमारे अनुभवों को दर्शाता है.
जिस तरह से हमारी मांसपेशियाँ उत्तेजित होती है उसी तरह से दिमाग भी उत्तेजित होता है. इसलिए लगातार आक्रामक और असभ्य गाने सुनने से दिमाग में स्थायी परिवर्तन आते हैं और आगे चलकर युवा पीढी अपराध की ओर जाने लगती है.
इन गानों को लगातार सुनने वाले युवक असामाजिक कार्यों में लिप्त होने लगते हैं. उनके अंदर जुनून भर जाता है, वे बात-बात पर गुस्सा होने लगते हैं और महिलाओं के प्रति सम्मान में कमी आने लगती है. इसकी वजह से ड्रग का सेवन करने, शराब का सेवन करने, छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाओं में भी बढोत्तरी होती है.

