सर्वाधिक, अधिकतर या 'बहुत' - इन शब्दों का हम कई बार इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या हम कभी सोचते हैं कि आखिर "सर्वाधिक" या 'बहुत" इस संज्ञा की मात्रा कितनी होती है?
मतलब यह कि जब हम कहते है कि "अधिकतर लोग ऐसा ही सोचते हैं.", "अधिकतर किस्सों में यही होता है", "वहाँ पर सर्वाधिक फसल उगती है", तब हमारा आशय आखिर क्या होता है? यहाँ प्रस्तुत वाक्यों मे "अधिकतर' और "सर्वाधिक" शब्दों का उपयोग हुआ है लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ कि सर्वाधिक यानी आखिर कितना अधिक या अधिकतर यानी कितना? अब एक वैज्ञानिक अभ्यास से इस रहस्य पर से पर्दा उठा है. कैम्ब्रीज़ यूनिवर्सिटी प्रेस की खबर के अनुसार तेल अवीव विश्वविद्यालय की प्रोफेसर मीरा एरियल ने "अधिकतर' या "सर्वाधिक" इन शब्दों में निहित मात्रा की पहचान कर ली है और वह होती है 80 से 95%. यानी कि जब हम अधिकतर या सर्वाधिक जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो हमारा आशय होता है 80-95%. उदाहरण के लिए जब हम कहते हैं "उसके अधिकतर प्रयोग असफल ही होते हैं' तो हमारा आशय होता है "उसके 80 से 95% प्रयोग असफल ही होते हैं."
कैसे की गई यह गणना?
मीरा एरियल ने अंग्रेजीभाषी 60 स्वयंसेवकों को चुना और उनको एक वाक्य सुनाया जिसमें "अधिकतर" शब्द आया था. इसके बाद इन स्वयंसेवकों से पूछा गया कि वे इस शब्द की कितनी दर कितनी समझते हैं? इस अभ्यास से पता चला कि अधिकतर लोग "अधिकतर" शब्द की दर 80% से 95% तक लगाते हैं.
अब तक यही समझा जाता था कि अधिकतर का मतलब होता है 51% से लेकर 99%. कुछ लोग इस दर को 50% से कुछ अधिक मानते थे. लेकिन मीरा एरियल इससे सहमत नहीं है. उनके अनुसार उनके प्रयोग ने सिद्ध किया है कि लोगों के लिए 'अधिकतर" या 'सर्वाधिक" शब्द की कीमत काफी अधिक यानी कि करीब 80 से 95% तक की होती है, लेकिन यह 99% तक भी नहीं होती. यानी कि भले ही लोग 'अधिकतर' शब्द का इस्तेमाल करें लेकिन वे शत प्रतिशत आश्वस्त नहीं होते.

