कुछ संगठन और समूह ऐसा ही मानते हैं. इन समूहों को इंटरनेट के ‘षड़यंत्र सिद्धांतवादी” कहा जाता है. इनकी वेब-बोट तकनीक ने पता लगाया है कि 21 दिसम्बर 2012, ही वह तिथि है जब कोई विनाशलीला इस दुनिया को खत्म कर देगी.हालाँकि इस व्याख्या में यकीन करने वाले लोग गिने चुने ही होंगे लेकिन फिर भी यह कहा जा सकता है कि उनकी संख्या एकदम कम भी नहीं है. इन समूहों का कहना है कि इसी स्वचालित बोट ने 11 सितम्बर के हमलों तथा 2004 की सुनामी का पूर्वाभास किया था और वे घटनाएँ हुई भी थी. इसलिए कोई वजह नहीं कि दुनिया के विनाश की व्याख्या को हल्के से लिया जाए.
लेकिन सवाल यह भी उठता है कि आखिर ऐसी कौन सी विनाशलीला होगी जो दुनिया को खत्म कर देगी. द टेलिग्राफ की खबर के अनुसार दुनिया के चुम्बकीय क्षैत्रों का बदलाव एक सम्भावित वजह हो सकती है. इस दिन तक दुनिया का चुम्बकीय क्षैत्र परिवर्तित होगा जिससे कई प्राकृतिक आपदाएँ आएंगी.
कैसे काम करता है यह बोट:
1990 में विकसित किया गया यह इंटरनेट बोट ठीक उसी तरह से काम करता है जिस तरह से सर्च इंजिन के स्पाइडर काम करते हैं. यह कई सारे वेब पन्नों की सूची तैयार करता, उनकी इंडेक्सिंग करता है और उन पन्नों में मौजूद सामग्री को खंगालता है. इस सामग्री के माध्यम से लोगों के भविष्य तथा उनके अनुमानों का आकलन किया जाता है.
यह विचित्र तरीका है, परंतु कई लाख लोग इस सिस्टम में यकीन रखते हैं. और इन लोगों की वजह से कई सारी अफवाहें भी फैलती है.
इस तरह के सिस्टम को किसी भी तरह से सुचारू नहीं माना जा सकता, ना ही इन पर यकीन करने की कोई ठोस वजह भी है. लेकिन सब लोग इससे उलट सोचते हैं.

