Monday, Feb 13th

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

दिमाग कई महत्वपूर्ण निर्णय हमारी जानकारी के बाहर लेता है!

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unconscious-mindऔर ऐसा कई बार होता है. हमारा दिमाग कई महत्वपूर्ण निर्णय स्वत: ही ले लेता है और हमें इसका अहसास तक नहीं होता. हमारा अवचेतन मन आसपास के वातावरण पर नज़र रखता है और हमारे स्वभाव और भूतकाल के अनुभवों के आधार पर स्वत: निर्णय लेकर कार्य पूर्ण कर देता है और हमारे चेतना तंत्र को इसका अहसास तक नहीं हो पाता. अवचेतन मन या unconscious brain लगातार जागृत रहता है और कई महत्वपूर्ण कार्य बिना सूचित किए पूर्ण कर देता है.

नेदरलैंड की उट्रेक विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ साइकोलोजी के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर काफी शोध किया है. उनके अभ्यास के अनुसार दुनिया भर के वैज्ञानिक कई दशकों से इस विषय पर खोजबीन कर रहे हैं और इस विषय पर आधारित कई सर्वे भी किए गए हैं.

25 वर्ष पहले ऐसा ही एक सर्वे किया गया था. सर्वे साधारण सा था. इस सर्वे के दौरान लोगों से कहा गया कि वे अपनी उंगली को हिलाएँ और महसूस करें कि उनको ऐसा करने मे कितना समय लगता है. किसी भी व्यक्ति को यह अहसास नहीं हुआ कि उन्होनें कब उंगली हिलाई. वास्तव में यह इतनी तेजी से होता है कि हमें अहसास ही नहीं हो पाता कि कब दिमाग ने निर्देश दिया. जबकि दिमाग को वह सारा काम करना पड़ता है. दिमाग से हमारे चेतना या नर्व सिस्टम को निर्देश दिया जाता है और वहाँ से वह उंगलियों की मांसपेशियों तक जाता है. दरअसल होता यह है कि आदेश मिलते ही दिमाग स्वत: निर्णय ले लेता है कि उंगली हिलानी है और उसे अंजाम भी दे देता है. हम कुछ समझ पाएँ उससे पहले ही.

एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार वैज्ञानिकों ने पाया है कि ऐसा खेल के दौरान भी होता है. अधिकतर खेल अवचेतन अवस्था में ही खेले जाते हैं. बॉलर के द्वारा फेंकी गई बॉल सेकंड भर के भीतर बल्लेबाज तक आ जाती है. उसके पास इतना समय नहीं होता कि वह बॉल की गति व दिशा को समझ कर सोच विचार कर निर्णय ले सके कि क्या करना है? उसका अवचेतन मन निर्णय ले चुका होता है और उसी तरह से काम भी करता है. इसके अलावा दिमाग आसपास की घटनाओं को परख कर उस हिसाब से अपनी कार्यशैली बदल भी लेता है. जब खिलाड़ियों के आसपास "जीतो", "कुछ हासिल करो" और "पैसे कमाओ" के बॉर्ड लगा दिए गए तो खिलाडियों ने महसूस किया कि उनका खेल और भी बेहतर बन गया. जबकि उन्होनें चाह कर कुछ भी नहीं किया. उनके दिमाग ने अपने आप निर्णय ले लिया कि कुछ हासिल करना है तो और मेहनत करनी पडेगी.

इसके अलावा कुछ और उदाहरण भी हैं जो इसे सत्यापित करते हैं. एक शोध में पाया गया कि यदि किसी कर्मचारी को ऑफिस में दाखिल होने के बाद अपनी डेस्क पर चमड़े की बैग रखी दिखाई दे तो उसकी कार्यक्षमता अपने आप बढ जाती है. इसके अलावा यदि कर्मचारियों को सफाई के लिए उपयोगी क्लिनिंग एजेंट की खुशबू आए तो वे अपनी डेस्क को साफ करने लग जाते हैं. यह सब भी उनके अवचेतन मन की वजह से होता है. उन्हें इसका अहसास नहीं होता.

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हमारे अभिभावकों, मित्रों से संबंधित कई निर्णय हम बिना अवचेतन अवस्था में ही ले लेते हैं. उसी तरह से हमारी खरीददारी की आदत, स्वास्थ्य संबंधि निर्णय आदि भी अवचेतन मन ले लेता है और हम एक अलग ही दुनिया में जीते रहते हैं.
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