अपने घर में आए नए मेहमान की खुशी आपकी नींद भी उड़ा सकती है. एक सर्वे से पता चला है कि शिशु के जन्म के 2 साल की अवधि के भीतर उसके माँ-बाप करीब 6 महिने की नींद खो देते हैं. अनुपात की दृष्टि से देखें तो शिशु के जन्म के बाद उसके अभिभावक हर रात बिना किसी व्यवधान के मात्र 4 घंटे ही सो पाते हैं. पूरी रात उनकी नींद बच्चे के रोने या उसके हिलने डुलने या उसे दूध पिलाने अथवा शौच साफ करने में बीत जाती है.सुबह उठकर तरोताजा रहने के लिए तथा पूरे दिन एकाग्रता के साथ कामक करने के लिए कम से कम 5 घंटों की बिना व्यवधान वाली नींद आवश्यक होती है. उससे कम नींद स्वभाव को चिड़चिड़ा बनाती है, रोगप्रतिरोधक क्षमता कम करती है और स्वभाव में त्वरित बदलाव लाती है. इससे रोजमर्रा का जीवन प्रभावित होता है.
बिस्तर बनाने वाली एक कम्पनी साइलेंटनाइट के सर्वे के अनुसार करीब 1000 अभिभावकों में से 3-4 अभिभावकों ने कहा कि वे हर रात मात्र 3 घंटे और हर 10 में 1 दम्पत्ति ने कहा कि वे मात्र 2-2.5 घंटे ही बिना व्यवधान के सो पाते हैं. स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह वांछित नहीं है. इससे नींद की कमी संग्रहित होती जाती है और फिर पूरे दिन थकान रहती है. यही नहीं इससे इंसान का "स्लीप पैटर्न" बदलने लगता है और वह थकान उतारने के लिए कभी भी सो सकता है.
इसका हल:
- अपनी नींद की आदतों में बदलाव लाएँ और कोशिश करें कि निर्धारित समय से थोड़ा पहले सोने जाएँ
- सुबह थोड़ी देर से उठें
- पोष्टिक आहार लें ताकी शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती रही
- व्यायाम करें और जोगिंग के लिए जाएँ

