Monday, Feb 13th

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

कुछ लोग भारी शोरगुल के बीच भी कैसे सो जाते हैं?

Print PDF
sleepingकई लोगों की नींद इतनी "कच्ची" होती है कि जरा सी आवाज़ से ही वे उठ जाते हैं, जबकि कुछ लोग इतनी गहरी नींद लेते हैं कि उनके कान के पास शोर करने से भी वे नहीं जागते. ऐसा कैसे होता होगा? कुछ लोग भारी शोर गुल के बीच भी कैसे सो पाते हैं?

वैज्ञानिकों ने अब इस प्रश्न का  हल खोज निकाला है. करंट बायोलोजी जर्नल की खबर के अनुसार शोधकर्ताओं की एक टीम ने खोज की है कि गहरी नींद में सोने वाले लोग बाहरी आवाज़ को ब्लॉक करने की क्षमता रखते हैं. बाहरी शोरगुल उनके दिमाग तक पहुँच ही नहीं पाता है और इससे उनकी नींद बाधित नहीं होती.

यह सिस्टम कुछ कुछ वैसे ही काम करता है जैसे कि आँख. जब हम सोते हैं तो हमारी आँख बंद हो जाती है और पुतलियाँ ऊपर की तरह चली जाती है. इससे रोशनी हमें बाधित नहीं कर पाती और नींद ले पाते हैं. इसी तरह से नींद लेते समय हमारा दिमाग कुछ तरंगे प्रवाहित करता है जिन्हें "स्पींडल" कहा जाता है. ये तरंगे बाहरी आवाजों को फिल्टर कर देती है और उन आवाजों का असर दिमाग पर नहीं हो पाता.

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों का दिमाग इस तरह की तरंगे बडी मात्रा में प्रवाहित करता है वे लोग भारी शोर शराबे की बीच भी सो पाते हैं.

दुनिया में जिन लोगों को नींद नहीं आने की परेशानी होती है उनमें से अधिकतर लोगों की शिकायत शोरगुल से संबंधित होती है. इस शोध के बाद इस तरह की दवाईयों को बनाना सम्भव हो सकता है जो "स्पींडल" जैसी तरंगो को बडी मात्रा में प्रवाहित करना सम्भव बनाए. इसके बाद लोग चैन की नींद ले पाएंगे.
BLOG COMMENTS POWERED BY DISQUS