इस बारे में लम्बी बहस हो सकती है और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खारिज भी किया जा सकता है. सवाल यह है कि क्या हम अपना भविष्य देख सकते हैं? इसका सटीक जवाब देना आज भी कठीन है परंतु एक शोधकर्ता ने अपने कुछ प्रयोगों से साबित किया है कि इंसान भविष्य देख लेता है चाहे वह अनायास ही क्यों ना हो.
जादुगर, मनोविज्ञानी और प्रोफेसर डेरिल बेम के अनुसार इंसान के अंदर भविष्य को भाँप लेने की कला मौजूद होती है और इसका प्रभाव उसके द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों पर भी पडता है. उदाहरण के लिए कुछ भी अवांछित घटित होने से ठीक पहले हम बैचेनी महसूस करने लगते हैं और कभी कभी हमे अनुभव होता है कि इस घटना को बिल्कुल ऐस तरह से ही घटित होना था.
बेम ने अपनी बात को साबित करने के लिए 1000 स्वयंसेवकों के ऊपर 9 अलग अलग प्रयोग किए. इसे बेम की सफलता ही माना जाएगा कि मात्र 1 को छोडकर सभी ने स्वीकार किया कि उन्हें बेम की बातों पर भरोसा हो रहा है कि उन्होनें भविष्य जान लिया था.
प्रयोग 1:
पहले प्रयोग में बेम ने स्वयंसेवकों से कुछ शब्दों की सूचि दी और पढने के लिए कहा. उसके बाद उनसे कहा गया कि वे सूचि के शब्दों को याद करें और बताएँ कि उन्होनें क्या पढा था. इसके बाद तीसरे चरण में उनसे कहा गया कि अब वे कुछ शब्दों को टाईप करें. यह चरण स्वयंसेवकों के लिए अनजान था. इस परीक्षण से पता चला कि स्वयंसेवकों ने वे शब्द अधिक अच्छी तरह से याद किए थे, जिनको उन्हें टाइप करना था. इससे साबित हुआ कि भविष्य में घटित होने वाली एक घटना ने उनकी यादशक्ति को प्रभावित किया था.
प्रयोग 2:
स्वयंसेवकों को एक कम्प्यूटर स्क्रीन पर दो पर्दे दिखाए गए. उनसे कहा गया कि किसी एक पर्दे के पीछे कामुक चित्र है. इसके बाद स्वयसेवकों को वह पर्दा चुनना था जिसके पीछे वह चित्र हो सकता था. नतीजे बताते हैं कि स्वयंसेवकों ने अधिसंख्य बार सही पर्दा चुना. यह दर मात्र सम्भावना की दर से काफी अधिक थी. दूसरी उल्लेखनीय बात यह है कि किस पर्दे के पीछे कामुक चित्र आएगा वह कम्प्यूटर प्रोग्राम से निर्धारित किया गया था.
द न्यू साइंटिस्ट की खबर के अनुसार ये दो प्रयोग और कुछ अन्य प्रयोगों ने साबित किया है कि हम भविष्य की कुछ घटनाओं के बारे में पहले से ही जान जाते हैं. इन प्रयोगों के नतीजों को मात्र "तुक्का" समझ कर नहीं टाला जा सकता है.

