और वह धारणा है यह - पुरूष मजबूत होते हैं और महिलाएँ कोमल होती हैं. इसलिए यदि किसी पुरूष के हाथ अपेक्षाकृत मुलायम हों तो उसे ग्लानि का अनुभव होने लगता है. क्योंकि नैसर्गिक रूप से हमारे मन में यह अवधारणा होती है कि पुरूष मजबूत ही होते हैं.
हाल ही में कराए गए एक सर्वे से इस बात और और भी बल मिला है. टफ्ट्स विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपने सर्वे के दौरान कुछ स्वयंसेवकों को दो तरह की गेंदें दी. कुछ गेंदें कठोर थी और कुछ मुलायम.
स्वयंसेवकों से कहा गया कि उन्हें इन गेंदों को लगातार दबाना है और इसके साथ साथ उनके आगे रखी कम्प्यूटर स्क्रीन पर आ रही तस्वीरों में से कौन सी तस्वीरें पुरूष की हैं और कौन सी महिलाओं की हैं यह बताना है.
ये तस्वीरें डिजिटली सम्पादित थी. यानी कि इन तस्वीरों को देखकर यह बता पाना मुश्किल था कि वह तस्वीर पुरूष की है या महिला की.
परंतु सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले थे. जिन स्वयंसेवकों को कठोर गेंद दबाने के लिए दी गई उन्होनें अधिकतर चेहरों को पुरूष के रूप में चिह्नित किया और जिन स्वयंसेवकों को मुलायम गेंद दबाने को दी गई उन्होनें अधिकतर चेहरों को महिला के रूप में चिह्नित किया.
हालाँकि सभी स्वयंसेवकों को एक ही तरह की तस्वीरें दिखाई गई थी. इस सर्वे से इस बात की पुष्टि हुई कि पुरूष और महिला की पहचान करते समय हम उसे स्पर्श करते समय किस तरह का अहसास (कठोर या मुलायम) होता यह ध्यान में रखते हैं.

