क्या कोई व्यक्ति हमेशा निरोगी रह सकता है? क्या हम 100 वर्ष का आयुष्य पा सकते हैं? क्या हम "चीरयुवा' रह सकते हैं?इन सभी सवालों का जवाब हाँ है. भूतकाल की अपेक्षा आज मृत्युदर में भारी गिरावट आई है और यह गिरावट भविष्य में शून्य भी हो जाएगी. आज विज्ञान की प्रगति ने इंसान को अधिक सक्षम और निरोगी बना दिया है और भविष्य और भी उज्जवल है.
एल्बर्ट आइंस्टाइन कॉलेज ऑफ मेडिसीन के संशोधकों ने अब एक नई खोज की है. इस टीम ने पता लगा लिया है क्यों कुछ लोग लम्बी उम्र प्राप्त करते हैं और अपनी वृद्धावस्था में भी निरोगी और तंदुरूस्त रहते हैं. इस टीम का मानना है कि इसके पीछे टेलोमिरेज़ नामक एंजाइम का हाथ है. टेलोमिरेज़ क्रोमोज़ोम के दोनों छोरों पर पाया जाता है और यह ठीक उसी तरह से काम करता है जैसे जूतों के लेस के दोनों कोनों पर लगा प्लास्टिक का कैप करता है.
इस टीम ने पता लगाया है कि जो लोग लम्बी आयु को प्राप्त करते हैं उनके शरीर में हाइपरएक्टीव या अत्यधिक सक्रीय टेलोमेरेज़ एंजाइम होता है जो शरीर के नष्ट हो रहे कोषों की मरम्मत कर देता है. जिन लोगों में टेलोमेरेज़ अधिक सक्रीय होता है उनका शरीर भी अधिक सक्रीय और तंदुरूस्त होता है.
अपने अभ्यास के दौरान इस टीम ने लगभग 97 वर्ष की आयु के 86 लोगों और उनकी 175 संतानों के शरीर का परीक्षण किया. इस अभ्यास से पता चला कि इन लोगों के शरीर में टेलोमेरेज़ को बनाने वाला सिस्टम अधिक विकसित था और टेलोमेर की लम्बाई भी अधिक थी. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इससे हृदय संबंधित और मधुमेह जैसी बिमारियाँ होने की सम्भावना काफी कम हो जाती है. ये दो बिमारियाँ ऐसी हैं जिनसे सर्वाधिक मौतें होती है.
इस टीम ने अपनी व्याख्या में लिखा है कि, हमारी शोध यह दर्शाती है कि टेलोमेर की लम्बाई और टेलोमेरेज जींस का मिश्रण इंसान को दीर्घायु प्रदान करता है और इससे घातक बिमारियों से बचा जा सकता है. अब हम उस मैकेनिज़म को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं जो टेलोमेरेज़ को हाइपरएक्टिव बनाता है. उसके बाद भविष्य में शायद ऐसी दवाईयाँ बन जाए जो टेलोमेरेज़ का विकल्प हो.
इसमें अभी कुछ समय लग सकता है, लेकिन यह असम्भव नही है. एक दिन इंसानों के लिए 100 वर्ष की जीवन एक आम बात होगी.

