एक नई शोध रिपोर्ट में वर्ष 2011 में सामने आने वाले सम्भावित साइबर खतरों के प्रति आगाह किया गया है. इस रिपोर्ट में उन तीन नए क्षैत्रों का विवरण दिया गया है जिनपर साइबर खतरों का सबसे अधिक डर है.
ज्योर्जिया टेक इनफोर्मेशन सेक्यूरिटी सेंटर की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल डिवाइजों पर इंटरनेट के बढ रहे प्रचलन और नेटवर्क डिवाइज़ों की वजह से साइबर अपराधियों के जानकारियाँ चुरा लेना आसान हो गया है और इससे कई संस्थानों के ऊपर साइबर खतरा मंडरा रहा है.
जिन तीन क्षैत्रों पर सबसे अधिक खतरा है वे हैं -
नेटवर्क सिस्टम - जिस तरह से दुनिया तेजी से एक बडे नेटवर्क में बदल रही है वैसे वैसे साइबर अपराधों का खतरा भी बढ रहा है. शोध संस्थान आपस में जुड रहे हैं, स्कूल और कॉलेज आपस मे जुड रहे हैं और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी. इससे यहाँ अवांछित और अनाधिकृत घुसपैठ का खतरा बढ गया है. जीटीआईएसएस की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों पर साइबर हमले होने की सम्भावना काफी प्रबल है.
बोटनेट - बोटनेट हमले के तहत किसी मलवेर को सुनियोजित तरीके से किसी बडे नेटवर्क पर प्रेषित कर पूरे सिस्टम को प्रभावित कर दिया जाता है. जीटीआईएसएस की रिपोर्ट के अनुसार 2011 में इस तरह के हमले पहले से अधिक संख्या मे होंगे. साइबर अपराधी अब काफी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर हानिकारक सोफ्टवेर फैला रहे हैं.
मोबाइल डिवाइज - आज मोबाइल फोन पर इंटरनेट एक्सेस आम बात हो गई है और लोग लाखों की संख्या में अप्लिकेशनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. कई मुफ्त अप्लिकेशनें डाउनलोड के लिए उपलब्ध है. परंतु इनमें से कई अप्लिकेशने असुरक्षित भी होती है. परंतु प्रयोक्ता सुरक्षा जाँच किए बगैर उन्हें अपने मोबाइल में इंस्टाल कर लेता है. इससे साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल डिवाइजों तक पहुँच बनाना सरल हो गया है. और इससे निजी और गोपनीय जानकारियों तक उनकी पहुँच हो रही है.
जीटीआईएसएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए अब परम्परागत तरीको को छोड़ नए तरीकों को आक्रामक ढंग से लागू करना होगा, वरना इसके घातक परिणाम सामने आएंगे.

