दिल्ली उच्चन्यायालय ने कल एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए महिला सैन्य अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन लागू किए जाने की बात कही थी. महिलाओं के लिए 33% संसदीय आरक्षण की तैयारियों के बाद यह दूसरी बड़ी खुशी कही जा सकती है.
क्या है यह आदेश:
इस आदेश के अनुसार पुरूष सैन्य अधिकारियों की तरह महिला सैन्य अधिकारियों को भी स्थायी कमीशन देने की बात कही गई है. फिलहाल पुरूष अधिकारी 5 से 10 वर्ष की ड्यूटी के बाद स्थायी हो जाते हैं और लेफ्टेनंट जनरल या जनरल की पोस्ट तक जा सकते हैं. अब महिलाएँ भी इस पद तक जा सकेंगी. अभी तक महिला सैन्य अधिकार लेफ्टेनेंट कर्नल की पोस्ट तक ही जा सकती हैं.
इसके अलावा अब महिला अधिकारियों को पेंशन तथा अन्य लाभ भी मिल सकेंगे.
परंतु यह आदेश अभी वायुसेना के लिए ही मान्य है. परंतु इसी तरह की अपील थलसेना और जलसेना के लिए भी की गई है और जो अभी न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है. लेकिन चुँकि वायुसेना की महिला अधिकारियों के लिए यह आदेश जारी किया गया है इसलिए बहुत सम्भव है कि सेना की अन्य दो शाखाओं के लिए भी समकक्ष आदेश जारी किया जाए.
वर्तमान स्थिति:
- फिलहाल महिलाओं को 5 से 14 वर्ष का शोर्ट सर्विस कमीशन मिलता है
- महिलाओं को 6 महिने की मेटरनिटी लीव, दो महिने की वार्षिक छुट्टी और 2 महिने की पीएल मिलती है.
- भूतपूर्व सैनिक को चिकित्सा सुविधा और क्लब सदस्यता मिलती है
- लेकिन भूतपूर्व सैनिक को पेंशन नहीं मिलती
भारतीय सेना में महिलाएँ:
- थलसेना में 35377 कुल अधिकारियों में से 4101 महिला अधिकारी हैं
- जलसेना में 7296 कुल अधिकारियों में से 252 महिला अधिकारी हैं
- वायुसेना में 10736 कुल अधिकारियों में से 784 महिला अधिकारी हैं
वैश्विक स्थिति:
अमेरिका की सेना में 20% महिलाएँ हैं. वहाँ की महिला सैन्य अधिकारी सीमित रूप से युद्ध में भाग लेती है. परंतु सहायक सेवाओं में महिला अधिकारी अधिक सक्रीय रहती हैं.
ब्रिटेन की सेना में 9% अधिकारी महिलाएँ हैं. वहाँ 90 के दशक के बाद महिलाओं के लिए कार्यक्षैत्र में वृद्धि की गई है.
इज़रायल में पुरूषों और महिलाओं के लिए सेना की नौकरी आवश्यक है. परंतु वहाँ भी महिलाओं को आम तौर पर युद्ध के मोर्चे पर नहीं भेजा जाता.
भारत में भी महिलाओं को युद्ध के मोर्चे पर नहीं भेजा जाता. वायुसेना महिला लड़ाकु पायलट नियुक्त करने के प्रस्ताव पर गम्भीरता से विचार कर रही है.

