ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है.ब्रह्मोस मिसाइल
ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रुज़ मिसाइल है. क्रुज मिसाइल वह होती है जो कम ऊँचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से रडार की आँख से बच जाती है. ब्रह्मोस की विशेषता यह है कि इसे जमीन से, हवा से, सबमरीन से, जहाज से यानी कि लगभग कहीं से भी दागा जा सकता है. यही नहीं इस मिसाइल को पारम्परिक लांचर के अलावा उर्ध्वगामी यानी कि वर्टिकल लॉंचर से भी दागा जा सकता है. ब्रह्मोस के मेनुवरेबल संस्करण का हाल ही में सफल परीक्षण किया गया. जिससे इस मिसाइल की मारक क्षमता में और भी बढोत्तरी हुई है.
क्या होती मेनुवरेबल तकनीक?
मेनुवरेबल तकनीक यानी कि दागे जाने के बाद अपने लक्ष्य तक पहुँचने से पहले मार्ग को बदलने की क्षमता. उदाहरण के लिए टैंक से छोड़े जाने वाले गोलों तथा अन्य मिसाइलों का लक्ष्य पहले से निश्चित होता है और वे वहीं जाकर गिरते हैं. या फिर लेज़र गाइडेड बम या मिसाइल होते हैं जो लेजर किरणों के आधार पर लक्ष्य को साधते हैं. परंतु यदि कोई लक्ष्य इन सब से दूर हो और लगातार गतिशील हो तो उसे निशाना बनाना कठीन हो सकता है. यहीं यह तकनीक काम आती है. ब्रह्मोस मेनुवरेबल मिसाइल है. दागे जाने के बाद लक्ष्य तक पहुँचते पहुँचते यदि उसका लक्ष्य मार्ग बदल ले तो यह मिसाइल भी अपना मार्ग बदल लेती है और उसे निशाना बना लेती है.
कौन कर रहा है विकसित?
ब्रह्मोस का विकास ब्रह्मोस कोर्पोरेशन किया जा रहा है. यह कम्पनी भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिशिया का सयुंक्त उपक्रम है. ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है. रूस इस प्रोजेक्ट में मिसाइल तकनीक उपलब्ध करवा रहा है और उड़ान के दौरान गाइड करने की क्षमता भारत के द्वारा विकसित की गई है.
ब्रह्मोस क्यों है बेजोड़?
मिसाइल तकनीक में दुनिया की कोई मिसाइल ब्रह्मोस की बराबरी नहीं कर सकती. इसकी खुबियाँ इसे दुनिया की सबसे मारक मिसाइल बनाती है. यहाँ तक की अमरीका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे फिसड्डी साबित होती है.
ब्रह्मोस की खूबियाँ -
- यह हवा में ही मार्ग बदल सकती है और चलते फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है.
- इसको वर्टिकल या सीधे कैसे भी लॉंचर से दागा जा सकता है.
- यह मिसाइल तकनीक थलसेना, जलसेना और वायुसेना तीनों के काम आ सकती है.
- यह 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भर सकती है और रडार की पकड में नहीं आती.
- रडार ही नहीं किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है. इसको मार गिराना लगभग असम्भव है
- ब्रह्मोस अमरीका की टॉम हॉक से लगभग दुगनी अधिक तेजी से वार कर सकती है, इसकी प्रहार क्षमता भी टॉम हॉक से अधिक है
- आम मिसाइलों के विपरित यह मिसाइल हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है
- यह मिसाइल 1200 यूनिट ऊर्जा पैदा कर अपने लक्ष्य को तहस नहस कर सकती है
भविष्य:
ब्रह्मोस कोर्प. अगले 10 साल में करीब 2000 ब्रह्मोस मिसाइल बनाएगा. इन मिसाइलों को रूस से लिए गए सुखोई लड़ाकु जहाजों में लगाया जाएगा.
ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल है, परंतु भविष्य में ब्रह्मोस 2 नाम से हाइपर सोनिक मिसाइल भी बनाई जाएगी जो 7 मैक की गति से वार करेगी. भारत अपनी स्वदेशी सबसोनिक मिसाइल निर्भय भी बना रहा है. ब्रह्मोस-2 करीब 6,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ 290 किलोमीटर दूरी तक लक्ष्य भेद सकेगी.
लेकिन इससे अधिक दूरी की मिसाइल का विकास रूस के साथ मिलकर सम्भव नहीं है क्योंकि रूस अंतरराष्ट्रीय मिसाइल तकनीक नियंत्रण संधि (एमटीसीआर) का हस्ताक्षरकर्ता है. इससे वह 300 किमी से अधिक मारक क्षमता वाली मिसाइल के विकास में अन्य देशों को मदद नहीं दे सकता है.

