भारत ने स्वदेशी मानवरहित टोही जहाज निशांत का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण एक नई तकनीक की जाँच करने के लिए किया गया था. इस तकनीक की मदद से किसी भी विमान की सेहत पर विमान से ही नज़र रखी जा सकेगी और उसे ठीक भी किया जा सकेगा. इससे गडबडी की जाँच करने या उसे ठीक करने के लिए जहाज को धरती पर उतारने की जरूरत नहीं रहेगी.
निशांत जैसे टोही विमान के लिए यह तकनीक काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि निशांत और ध्रुव जैसे टोही विमानों को लम्बे समय तक आकाश में रखा जाना है ताकी दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके. उन्हें बार बार उतारना हितावह नहीं होता.
दूसरी तरह यह तकनीक अन्य लड़ाकु विमानों जैसे एलसीए तेजस, प्रस्तावित मीडियम कोम्बेट एयरक्राफ्ट और पाँचवी पीढी के प्रस्तावित लडाकु जहाज में भी काम आएगी. और डीआरडीओ के वैज्ञानिक आर.के. गुप्ता के अनुसार यह तकनीक नागरिक उड्डयन विमानों के लिए भी उपयोगी है.
इस तकनीक का विकास एयरोनोटिकल डेवलपमेंट एस्टबलिशमेंट और नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज़ ने मिलकर किया है. इस तकनीक की मदद से अब निशांत जैसे टोही विमान को एक निश्चित अवधि के बाद जरूरी जाँच के लिए जमीन पर उतारने से बचा जा सकेगा.
निशांत के बारे में -
निशान्त एक मानवरहित यान (यूएवी) जिसे डीआरडीओ ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विकसित किया है. निशान्त यूएवी मुख्य रूप से शत्रु के क्षेत्र से खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, लक्ष्य पद, तोपखाने का मारक सुधार करने, क्षति आकलन इत्यादि के लिए बनाया गया है. इसकी उड़ान क्षमता 4 घंटे और 30 मिनट है.
निशान्त यूएवी को पन-वायवीय लांचर से रेल-प्रक्षेपण की आवश्यकता होती है और इसे नीचे उतारने के लिए पैराशूट प्रणाली चाहिए होती है.

