Wednesday, May 23rd

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

कौन होगा भारतीय वायुसेना का आगामी मुख्य युद्धक जहाज

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भारतीय वायुसेना ने हाल ही में अपना 77वाँ जन्मदिवस मनाया है. भारतीय वायुसेना दुनिया की एक सबसे सक्षम वायुसेना मानी जाती है. लेकिन विगत कुछ वर्षों में इसकी ताकत में उल्लेखनीय कमी आई है. विशेषज्ञों के अनुसार भारत को फिलहाल 45 स्क्वोड्रन की जरूरत है जबकि वास्तव में 33 स्क्वोड्रन ही कार्यरत है. एक स्क्वोड्रन में करीब 12 से 16 विमान होते हैं. इससे साबित होता है कि देश लड़ाकु जहाजों की कमी झेल रहा है.

यह खाली जगह भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. भारत अगली पीढी के नए युद्धक जहाज खरीदने जा रहा है. यह अब तक का बड़ा रक्षा खर्च होगा जिसपर 45 हजार से 50 हजार करोड़ रूपए खर्च किए जाएंगे. सौदा बड़ा है इसलिए दुनिया भर की निगाहें इस पर टीकी हुई हैं, और विक्रेता आस लगाए बैठे हैं. आइए जाने कि इस दौड में कौन कौन से लड़ाकु जहाज शामिल हैं.

एफ16 आईएन सुपर वाइपर:
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निर्माता कम्पनी: लोकहिड मार्टिन, अमेरिका
लम्बाई/चौड़ाई/ऊँचाई: 19’5”/ 32’8” / 16’
वजन: 19200 किलो
गति: 2414 किलोमीटर प्रतिघंटा
रेंज: 3880 किलोमीटर
कीमत: 6-7 करोड़ डॉलर

सकारात्मक बात – अमेरिकी बनावट का यह विमान दुनिया का एक सबसे विकसित लड़ाकु जहाज है. यह विमान दिन-रात किसी भी वातावरण में कार्यरत रह सकता है.

नकारात्मक बात – जो एक बात इस विमान के खिलाफ जाती है वह यह कि पाकिस्तान के पास इसी विमान का पुराना संस्करण मौजूद है तथा पाक वायुसेना इस जहाज के बारे में लगभग सबकुछ जानती है.

एफ18 ईएफ सुपर होर्नेट:
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निर्माता कम्पनी: लोकहिड मार्टिन, अमेरिका
लम्बाई/चौड़ाई/ऊँचाई: 60’1” / 44’8” / 16’
वजन: 16850 किलो
गति: 1915 किलोमीटर प्रतिघंटा
रेंज: 3054 किलोमीटर
कीमत: 10-11 करोड़ डॉलर

सकारात्मक बात – इसका रडार एपीजी-79 दूर तक नज़र रख सकता है. इसकी संचार व्यवस्था बेजोड़ है.

नकारात्मक बात – इसकी कीमत अधिक है और अमेरिकी सरकार इस विमान को भारत में एसेम्बल करने की इज़ाजत देने से हिचकिचाएगी. यह विमान अमेरिका का एक प्रमुख लड़ाकु जहाज है.

मिग-35
mig-35.jpg
निर्माता: रूस
लम्बाई/चौड़ाई/ऊँचाई: 62’4” / 49’3” / 19’8”
वजन: 29700 किलो
गति: 2400 किलोमीटर प्रतिघंटा
रेंज: 4000 किलोमीटर
कीमत: 5-6 करोड़ डॉलर

सकारात्मक बात – भारतीय वायुसेना वर्षों से मिग विमानों का इस्तेमाल करती आई है तथा भारतीय पायलट मिग विमान उड़ाने में दक्ष हैं. यह विमान अपेक्षाकृत सस्ता है.

नकारात्मक बात – भारतीय रक्षा मंत्रालय अब रूस पर अधिक निर्भर नहीं रहना चाहेगा. एडमिरल गोर्शकोय विमानवाहक पोत की खरीदी में आ रही बाधाओं से देश को बुरा अनुभव हुआ है.

ग्रिपेन
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निर्माता: स्विडन
लम्बाई/चौड़ाई/ऊँचाई: 46’3” / 27’7” / 14’9”
वजन: 31000 किलो
गति: 2130 किलोमीटर प्रतिघंटा
रेंज: 3200 किलोमीटर
कीमत: 6-7 करोड़ डॉलर

सकारात्मक बात – यह विमान किसी भी परिस्थिति में उड़ान भर सकता है. जरूरत पड़ने पर रन वे की बजाय सामान्य सड़क से भी उड़ान भरी जा सकती है. इसका रडार काफी विकसित है. इसका मेंटेंनेंस खर्च भी कम है.

नकारात्मक बात – दुनिया के विकसित देश इसका इस्तेमाल नहीं करते. युद्ध मोर्चों पर इसकी खरी कसौटी होनी बाकी है.

यूरोफाइटर टाइफून
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निर्माता: यूरोप [ब्रिटेन, जर्मनी, इटाली, स्पेन]
लम्बाई/चौड़ाई/ऊँचाई: 52’5” / 35’ / 17’4”
वजन: 23500 किलो
गति: 2495 किलोमीटर प्रतिघंटा
रेंज: 3790 किलोमीटर
कीमत: 12-14 करोड़ डॉलर

सकारात्मक बात – इस जहाज की सबसे बड़ी खूबी है इस पर लादे जा सकने वाले हथियारों की मात्रा. इस जहाज पर भारी मात्रा में गोला बारूद और मिसाइलें लगाई जा सकती है.

नकारात्मक बात – यह काफी महंगा है, और सभी युद्ध विशेषज्ञ अभी इसे पूर्ण युद्ध जहाज भी नहीं मानते.

राफेल:
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निर्माता: फ्रांस
लम्बाई/चौड़ाई/ऊँचाई: 50’1” / 34’5’ / 17’5”
वजन: 24500 किलो
गति: 2130 किलोमीटर प्रतिघंटा
रेंज: 3700 किलोमीटर
कीमत: 9-10 करोड़ डॉलर

सकारात्मक बात – यह फ्रांस द्वारा अपनी वायुसेना के लिए निर्मित जहाज है. इसमें अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल हुआ है. अफगानिस्तान में इस जहाज ने फ्रांस की वायुसेना का अच्छा साथ निभाया है.

नकारात्मक बात – यह काफी नया युद्ध जहाज है और इसका विस्तृत परीक्षण अभी बाकी है. यह काफी महंगा भी है.

तो इनमें से कौन सा जहाज भारतीय वायुसेना का अगला “रामबाण’ बनेगा. इसका जवाब जानने के लिए अभी काफी इंतजार करना होगा. 2012 से पहले यह कोंट्राक्ट किसी को हासिल होने की उम्मीद नहीं है.
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