रिसर्च इन मोशन का ब्लैकबेरी फोन इस्तेमाल की दृष्टि से देखा जाए तो दूसरे नम्बर पर आता है. दुनिया में सबसे अधिक मोबाइल फोन नोकिया के सिम्बियन ओएस आधारित होते हैं, और इसके बाद नम्बर आता है ब्लैकबेरी का. विगत कुछ वर्षों में ब्लैकबेरी फोनों की लोकप्रियता में काफी बढोत्तरी हुई है. परंतु आजकल ब्लैकबेरी अपनी उस सुविधा की वजह से परेशानी का सामना कर रहा है जो कभी उसके लिए प्रचार का एक माध्यम हुआ करता था.रिम की डेटा इंस्क्रिप्शन प्रणाली अब उसके लिए परेशानी की वजह बन गई है, क्योंकि दुनिया के कई देश इस वजह से या तो ब्लैकबेरी फोनों पर प्रतिबंध लगा चुके हैं या फिर लगाने की तैयारी में हैं. भारत भी इन देशों में शामिल है. भारत सरकार ने रिम से कहा था कि वह अपनी डेटा इंस्क्रिप्शन प्रणाली मे बदलाव करे ताकी जरूरत पड़ने पर सुरक्षा एजेंसियाँ उन आँकडों और हो रही बातचीत को पढ सकें. परंतु रिम ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया. रिम का तर्क है कि उसने इस प्रणाली को इस तरह से विकसित किया है कि कोई थर्ड पार्टी अनाधिकृत सम्पर्क सम्भव ही नहीं है. यहाँ तक कि रिम स्वयं इस डेटा तक अपनी पहुँच नहीं बना सकता.
परंतु सरकार के गले यह तर्क उतरे इसकी सम्भावना कम ही है. गृह मंत्रालय के सुत्रों के अनुसार रिम के ब्लैकबेरी फोन की वजह से देश की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है. आतंकवादी तत्व आपसी बातचीत और सुचनाओं के आदान प्रदान के लिए इस फोन का इस्तेमाल करते हैं, और इसकी डेटा इंस्क्रिपशन की जटिल प्रणाली उन आँकडों तक सुरक्षा एजेंसियों की पहुँच को रोकती है. रिम का कहना है कि उसकी और सरकार के बीच की बातचीत अभी जारी है, परंतु बहुत सम्भावना है कि यदि कोई नतीजा ना निकले तो ब्लैकबेरी फोन पर प्रतिबंध लगा दिया जाए चाहे कुछ समय के लिए ही सही. दुनिया के कुछ देश ऐसा कर भी चुके हैं -
सयुंक्त अरब अमीरात ने इस सप्ताह घोषणा की कि वह ब्लैकबेरी फोनों पर प्रतिबंध लगा रहा है. यह प्रतिबंद अक्टूबर से लागू होगा और इसके अंदर स्थानीय नागरिकों के साथ साथ सैलानी भी आएंगे. इससे पहले यूएई के संचार मंत्रालय ने ब्लैकबेरी प्रयोक्ताओं को एक सोफ्टवेर इंस्टाल करने को कहा था जो कि एक स्पायवेर था. इसकी मदद से कॉल ट्रेक की जा सकती थी जो डेटा बीच में ही इंटरसेप्ट किया जा सकता था. मगर वह योजना अधिक रंग नहीं लाई.
यूएअई के अलावा सउदी अरब भी ब्लैकबेरी फोन पर प्रतिबंध लगा सकता है. मलेशिया और इंडोनेशिया ने भी कहा है कि ब्लैकबेरी फोनों पर प्रतिबंध सम्भव है. जोर्डन ने हालाँकि प्रतिबंध लगाने से इंकार किया है परंतु साथ ही यह भी जोडा है कि यदि देश की सुरक्षा एजेंसियाँ चेताएंगी तो प्रतिबंध सम्भव है. पाकिस्तान मई 2010 में कुछ समय के लिए ब्लैकबेरी सर्विस पर प्रतिबंध लगा चुका है. फ्रांस ने भी सरकारी कर्मचारियों के ब्लैकबेरी फोन इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा रखा है. फ्रांस सरकार को डर है कि इससे "अमेरिका" उनके देश पर जासूसी कर सकता है. हालाँकि रिम इस तर्क से सहमत नहीं है. रिम का कहना है कि अमेरिका की सुरक्षा और गुप्तचर एजेंसियों के पास ऐसी तकनीक ही नहीं है कि वह उसकी डेटा इंस्क्रिपशन प्रणाली को भेद सके.
स्वयं अमेरिका ने अपने सैनिकों के ब्लैकबेरी फोनों पर तरह तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं. अमेरिकी वायुसेना के सिपाही ब्लैकबेरी फोन का इस्तेमाल तो कर सकते हैं परंतु उन फोनों की ब्लूटूथ सेवा निकाल दी जाती है. सैनिक ईमेल में कोई अटैचमेंट नहीं भेज सकते. तस्वीरें और वीडियो साझा नहीं कर सकते और कोई अप्लिकेशन डाउनलोड भी नहीं कर सकते. और सैनिक ही क्यों स्वयं राष्ट्रपति बराक ओबामा को व्हाइट हाउस जाते समय अपने साथ अपने प्रिय ब्लैकबेरी फोन को ले जाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े थे. वे अधिकारियों को समझाने में कामयाब तो हुए परंतु उनके "प्रसिडेंशियल फोन" से कई सुविधाएँ हटा दी गई.

