जल्द ही ऐसा समय आ सकता है जब हर घर में अपने खुद के पावर प्लांट होंगे. ये बिजली पैदा करेंगे जिनसे एक घर की ऊर्जा की जरूरत पूरी हो जाएगी. घभराइए नहीं ये पावर प्लांट काफी छोटे होंगे. आज के परिदृश्य में देखें तो ये मात्र एक पार्किंग स्थल की जगह लेंगे लेकिन भविष्य में इतने छोटे होंगे की किसी भी टेबल पर रखे जा सकेंगे. एक अप्रवासीय भारतीय के.आर. श्रीधर की अमेरिका स्थित कम्पनी ब्लूम एनर्जी कोर्पोरेशन द्वारा आविष्कारित ब्लूम बॉक्सेस [नाम अब बदल दिया गया है] पावर जनरेटर हैं जो अपेक्षाकृत सस्ती दर में बिजली पैदा करते हैं और उनसे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुँचता है.
गूगल, फेडएक्स और वालमार्ट जैसी कम्पनियों ने इन ब्लूम बॉक्स जनरेटरों का प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल शुरू किया है. और ईबे नामक कम्पनी ने तो कई सारे ब्लूम बॉक्स अपने कैम्पस में लगवाए हैं, जिनसे अब बिजली पैदा की जा रही है.
ब्लूम बोक्स पार्किंग स्थल की जितनी जगह पर स्थापित किए जा सकते हैं. ये प्राकृतिक गैस, मिथेन या बायोगैस से ऊर्जा तैयार करते हैं. एक ब्लूम एनर्जी सर्वर 100 किलोवॉट बिजली पैदा कर सकता है.
कैसे तैयार होती है ऊर्जा?
ब्लूम एनर्जी सर्वर के द्वारा बिजली बनाने की तकनीक नई नहीं है, लेकिन इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं. इसमें सोलिड ऑक्साइड फ्यूल सेल का इस्तेमाल होता है. कई सारे छोटे सेल को मिलाकर एक बड़ी डिवाइज़ बनाई जाती है.
लेकिन ब्लूम एनर्जी सर्वर दो गुप्त स्याहियाँ इस्तेमाल में लाई जाती है जिनका फार्मुला बताने से कम्पनी इंकार करती है. हरी स्याही एनोड और काली स्याही कैथोड का कार्य करती है और इनसे ऊर्जा का निर्माण सरल होता है.
क्या यह तकनीक अपनाने योग्य है?
फिलहाल यह तकनीक मँहगी है. एक रेफ्रिजरेटर के जितना बड़ा ब्लूम एनर्जी सर्वर 3.5 करोड़ रूपए का आता है जो कि काफी महंगा है. लेकिन कम्पनी का इरादा छोटे आकार का सर्वर बनाने का है जिसकी कीमत 1,38,000 के आसपास की होगी. देखना होगा की ब्लूम एनर्जी कोर्पोरेशन कब तक यह लक्ष्य हासिल करती है.

