ईमेल भेजने के लिए, अथवा दूसरे शब्दों में कहें तो आँकड़ों का आदान प्रदान करने के लिए तार और बेतार [Wire and Wireless] दोनों तरह की तकनीकों का सफल उपयोग फिलहाल किया जा रहा है. इस तरह से तार और हवा संचार के दो माध्यम बनते हैं. अब इसमें जो तीसरा माध्यम जुड़ने वाला है वह है इंसान का शरीर. सिओल की यूनिवर्सिटी ऑफ कोरिया के संशोधकों ने इंसान के शरीर में से आँकड़े प्रवाहित करने का सफल प्रयोग किया है. संशोधकों ने एक व्यक्ति की बाँह में से 10 एमबी प्रति सैकंड की गति से डिजिटल आँकड़े प्रवाहित किए.
कैसे किया गया परीक्षण?
इसके लिए उस व्यक्ति की बाँह पर 30 सेमी की दूरी पर दो इलैक्ट्रोड लगाए गए. दोनों इलैक्ट्रोड काफी पतले थे. इन्हें बाहँ पर लगाया गया और आँकड़े प्रवाहित किए गए.
कैसी होती है यह डिवाइज?
इन इलैक्ट्रोड से बनी डिवाइज करीब 300 माइक्रोमीटर ही मोटी होती है. 300 माइक्रोमीटर यानी कि हमारे तीन बालों के जितनी मोटाई. इस डिवाइज को बाँह पर या कान के पीछे करीब एक सप्ताह तक लगाकर रखा जा सकता है. यह डिवाइज अन्य संचार माध्यमों की अपेक्षा काफी कम ऊर्जा का व्यय करती है.
उदाहरण के लिए ब्लूटूथ जैसी तकनीक की अपेक्षा यह तकनीक 90% कम ऊर्जा का व्यय करती है. इससे यह सस्ती और काफी उपयोगी साबित हो सकती है.
इसका उपयोग:
वैसे इस तकनीक के माध्यम से आँकडों का शरीर के अंदर से संचार सम्भव है. दूसरे शब्दों में शरीर के माध्यम से ईमेल भी भेजा जा सकता है. परंतु इस तकनीक का मूल उपयोग शरीर की जाँच करने में होगा. उदाहरण के लिए वर्तमान परिस्थितियों में किसी व्यक्ति के रक्तचाप का, खून में चीनी की मात्रा का तथा हृदय की इलैक्ट्रिकल गतिविधियों की लगातार जाँच करना या तो सम्भव नहीं है या फिर यह काफी मँहगी पड़ती है.
दूसरा यह कि यदि इस तरह की कोई जाँच करनी हो तो उस व्यक्ति के शरीर पर ढेर सारे तार और डिवाइज़ें लगानी पड़ती है. यदि वायरलैस माध्यम का इस्तेमाल करना हो तो ढेर सारी बैटरियों की आवश्यकता पड़ती है और यह काफी खर्चीला भी होता है.
लेकिन इस तकनीक के विकसित हो जाने के बाद इन सभी समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा. इस तकनीक के आधार पर बनी डिवाइजें अत्यधिक छोटी होंगी और इंसान के शरीर को ही संचार का एक माध्यम बना लेंगी जिससे ढेर सारे तारों और बैटरियों से छुटकारा मिल जाएगा.
न्यू साइंटिस्ट की खबर के अनुसार भविष्य में चमड़ी के अंदर लगाई जा सकने वाली डिवाइजें भी बन जाएगी जो लम्बे काल तक कार्यरत रह पाएंगी. इस तकनीक से असाध्य बिमारियों का इलाज करने में काफी मदद मिलेगी.

