पोर्टेबल स्टोरेज डिवाइज़ की कथा फ्लोपी डिस्क से शुरू हुई थी और फिर सीडी, डीवीडी, ब्लू रे से होती हुई फ्लेश ड्राइव तक आई है. वैसे आजकल मोबाइल फोन, डेटा कार्ड तथा कुछ अन्य प्रकार की डिवाइजों में भी आँकड़े संग्रहित किए जा सकते हैं. परंतु वोल्यूम के दृष्टिकोण से देखा जाए तो डीवीडी और ब्लू रे डिस्क सबसे अधिक प्रचलित स्टोरेज डिवाइजें हैं. जहाँ एक ब्लू रे डिस्क में 4 डीवीडी की स्टोरेज क्षमता जितना डेटा संग्रहित किया जा सकता है. वहीं अब कुछ जापानी वैज्ञानिकों ने एक ऐसी सुपर डिस्क बनाई है जिसकी स्टोरेज क्षमता बेजोड़ होगी, क्योंकि इसमें 4-5 नहीं बल्कि 1000 ब्लू रे डिस्क में समा सके इतने आँकड़े संग्रहित किए जा सकेंगे.
यह सुपर डिस्क एक विशेष पदार्थ से बनी है. यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो के रसायनशाष्त्र के प्रोफेसर शिन ची ओकोशी के अनुसार इस विशेष पदार्थ की काले रंग की धातु जो विद्युत को कंडक्ट करती है रोशनी के सम्पर्क में आने पर कत्थई रंग के सेमीकंडक्टर में बदल जाती है. यह पदार्थ टाइटैनियम ऑक्साइड का नया क्रिस्टल अवतरण है.
इसकी विशेषता यह है कि रोशनी के सम्पर्क में आने पर यह काले रंग के कंडक्टर और कत्थई रंग के सेमीकंडक्टर में बदलता रहता है. यह चिप के "ऑन - ऑफ" फंक्शन की तरह ही काम करता है और आँकड़ों के हिसाब से रंग बदल कर उन्हें प्रेषित कर सकता है.
दूसरी विशेषता है इसका कद. ओकोशी और उनकी टीम ने इस पदार्थ को 5 से 20 नैनोमीटर के व्यास में ढालने में सफलता अर्जित की है. यदि इतनी छोटे कद के पदार्थ को मिलाकर एक डिस्क तैयार की जाए तो उसमें 1000 ब्लू रे डिस्क में समा सके उससे भी अधिक आँकड़े संग्रहित किए जा सकेंगे.
दिक्कत:
फिलहाल दिक्कत यह है कि तोकोशी और उनकी टीम ने परीक्षणों के दौरान सटीक नतीजे तो प्राप्त किए हैं और इस पदार्थ की कार्यकुशलता पर संदेह भी नहीं है, परंतु अभी इस तकनीक पर आधारित डिस्क के बाज़ार में आने की सम्भावना नहिवत है. ऐसा इसलिए क्योंकि अभी इस तकनीक पर आधारित डेटा राइटिंग डिवाइजों और रीडर का विकास किया जाना बाकी है.
परंतु फिर भी भविष्य का एक द्वार जरूर खुल गया. भविष्य में इस तरह की "सुपर डिस्क" का चलना काफी बढेगा.

