Wednesday, May 23rd

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

3जी का क ख ग

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3gपिछले दिनों 3जी स्पैक्ट्रम की हुई निलामी ने सरकार को एक तरह से मालामाल कर दिया. निजी कम्पनियों ने प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए जिस तरह से बोली लगाई उससे प्राप्त रकम सरकार की उम्मीद से कहीं अधिक थी.

आखिर मोबाइल कम्पनियाँ 3जी को लेकर इतनी गम्भीर क्यों है? क्या है 3जी तकनीक और इसके आगमन से क्या बदलाव आएगा?

3जी का मतलब है थर्ड जनरेशन या तीसरी पीढी की मोबाइल सेवा. फिलहाल देश में 2जी तकनीक पर आधारित मोबाइल सेवा उपलब्ध है. 3जी तकनीक दुनिया के लिए नई नहीं है परंतु लालफिताशाही तथा बाबुओं से घिरी भारत सरकार ने इस तकनीक को अपनाने में काफी देर कर दी है. अब तो अमरीका और जापान जैसे देशों में 4जी सेवा भी उपलब्ध हो चुकी है.

2जी की बजाय 3जी पर आधारित मोबाइल सेवा उपभोक्ताओं तथा ओपरेटरों दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. इसकी वजहें भी काफी है -

3जी तीसरी पीढी की वायरलेस तकनीक है जो आवाज़ और डेटा यानी कि ब्रोडबैंड इंटरनेट को एक साथ संचालित कर सकती है. वर्तमान 2जी तकनीक में सीमित बैंडविथ मिलती है, जिससे कई दिक्कतें सामने आती है. इससे कॉल ड्राप होते हैं, कनेक्शन मिलने में परेशानी आती है और आवाज़ भी टूटती रहती है. इसके अलावा इस समय उपलब्ध जीपीआरएस सेवा से संचालित इंटरनेट भी काफी धीमा काम करता है.

3जी इन सभी समस्याओं से छुटकारा दिला देगी. 3जी के अंतर्गत काफी बडी मात्रा में बैंडविथ उपलब्ध होगी जिससे नेटवर्क जाम नहीं होगा और आवाज़ की गुणवत्ता भी काफी बढ जाएगी.

इसके अलावा अब मोबाइल पर तेज गति का इंटरनेट [3 एमबी प्रति सैकंड] उपलब्ध होगा. 2जी पर यह गति लगभग 144 केबी प्रति सैकंड तक प्राप्त होती है.

तेज गति के इंटरनेट की वजह से बड़ी फाइलें, फिल्में, गाने आदि आसानी से डाउनलोड किए जा सकेंगे. ओनलाइन फिल्में और टीवी देखी जा सकेगी.

व्यापारी गण मोबाइल कांफ्रेसिंग कर पाएंगे, ईमेल के माध्यम से बड़े अटैचमैंट भेज पाएंगे और वीडियो चैटिंग एक आम बात होगी.

3जी की वजह से मोबाइल बैंकिंग और माइक्रो फाइनेंस को बढावा मिलेगा. तेज गति के सुरक्षित इंटरनेट की वजह से बैंकिंग अब मोबाइल के माध्यम से ही की जाएगी.

इतिहास:
3जी तकनीक पर आधारित पहली वाणिज्यिक मोबाइल सेवा जापान की एनटीटी डोकोमो ने 1 अक्टूबर 2001 को शुरू की थी. परंतु यह सेवा काफी सीमित क्षैत्र में ही उपलब्ध थी.

अमरीका में यह तकनीक मोनेट मोबाइल नेटवर्क ने शुरू की परंतु बाद में यह कम्पनी बंद हो गई. इसके बाद वैरीज़ोन वायरलैस ने 2003 में यह सेवा शुरू की.

एशिया में मोबाइल इराक ने यह सेवा फरवरी 2007 में शुरू की. चीन ने 2008 मे इसे अपनाने की ओर कदम बढाया. भारत की दो सरकारी टेलीफोन सेवा प्रदाता कम्पनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल को भी इसे साल इस तकनीक पर आधारित सेवा प्रदान करने का लाइसेंस मिला. बीएसएनएल ने बिहार में सबसे पहले यह सेवा शुरू की.

भविष्य -
भारतीय मोबाइल सेवा प्रदाता कम्पनियों ने 3जी लाइसेंस के लिए काफी बड़ी रकम दाँव पर लगाई है, लेकिन उन्हें पता है कि इससे उन्हें नुकसान नहीं होने जा रहा है. भारत में फिलहाल 60 करोड मोबाइल उपभोक्ता हैं. एक अनुमान है कि 2012 तक यह संख्या दुगनी हो सकती है. आज एक व्यक्ति के पास एक से अधिक कम्पनियों के सिम होते हैं, इसलिए यह संख्या काफी तेजी से बढ सकती है. इसका प्रमाण यह है कि भारत में प्रति माह 2 करोड़ सिम बेचे जा रहे हैं.

दूसरी तरफ करीब 4 करोड़ भारतीय उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके पास 3जी फीचर से लैस मोबाइल फोन पहले से ही हैं. इसलिए इन उपभोक्ताओं तक सीधी पहुँच बनाई जा सकती है. बाकी उपभोक्ताओं को अपना हैंडसेट बदलना होगा. इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि 3जी सेवा ना केवल मोबाइल ओपरेटरों बल्कि मोबाइल फोन बनाने वाली कम्पनियो के लिए भी फायदे का सौदा साबित होने जा रही है.
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