भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने इसकी परिकल्पना की थी और उनकी सलाह के अनुसार ही इस परियोजना पर काम शुरू हुआ था. परियोजना थी एक बृहद अफ्रीका नेटवर्क [Pan African Network] स्थापित करना और अफ्रीका के सभी देशों को आपस में जोड़ना और ई-शिक्षा तथा ई-चिकित्सा की सुविधा प्रदान करना. इस बहुपयोगी सेवा का प्रथम चरण पूरा हो चुका है और विदेशमंत्री एस.एम.कृष्णा आज इस परियोजना के दूसरे चरण का उद्घाटन करेंगे. इसके प्रथम चरण में 11 अफ्रीकन देशों को आपस में फाइबर ऑप्टिक केबलों के जाल से जोड़ा गया था. द्वितीय चरण में 12 और देश जुड़ने जा रहे हैं.
इस बीच यूरोपीयन इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिएटीव स्ट्रेटेजिज़ ने इस परियोजना को प्रसिद्ध हेमरेज़ पुरस्कार देने की घोषणा की है. यह संस्था यूरोप तथा बाकी देशों की ऐसी नई और रचनात्मक परियोजना को पुरस्कृत करती है जिनसे आम लोगों का भला हो. इस पुरस्कार के तहत एक प्रमाणपत्र और हेमरेज़ [ग्रीक भगवान जो संदेशों का आदान प्रदान करते हैं] की मूर्ति दी जाती है.
क्या है यह परियोजना?
यह भारत की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है. इस परियोजना के माध्यम से भारत अफ्रीका के लोगों तक अपनी पहुँच बनाना चाहता है और अफ्रीका के देशों में देश की छवि को सुधारना और मजबूत बनाना इस परियोजना का एक मुख्य उद्देश्य है. इस परियोजना के तहत अफ्रीका के 53 देशों और द्विपों को आपस में जोड़ा जाना है. इसके लिए अब तक 47 देशो के साथ समझौता हो चुका है. इस परियोजना के तहत फाइबर ऑप्टिक केबलों का जाल बिछाया जा रहा है जिससे अफ्रीका के छात्र मुफ्त ई-शिक्षा ले पाएंगे और आम लोगों तक ई-चिकित्सा भे पहुँचाई जाएगी. एक दूसरा वीवीआईपी नेटवर्क भी स्थापित किया जा रहा है जिससे अफ्रीका की स्थानीय सरकारी कार्यालय आपस में जुड़े रहेंगे और वीडियो कांफ्रेंसिग की सुविधा उपलब्ध होगी.
अब तक जिन देशों को यह लाभ मिलना शुरू हो गया है वे हैं - बेनिन, बुर्किना फासो, गैबन, गाम्बिया, घाना, इथोपिया, मोरिशस, नाइजीरिया, रवांडा, सेनेगल, शेसेल्स, बोत्सवाना, बरूंडी, आइवरी कोस्ट, जीबोटी, इजिप्त, इरिट्रिया, लीबिया, मलावी, मोज़ाम्बिक, सोमालिया और युगांडा.
कई भारतीय शैक्षणिक संस्थानों ने इस परियोजना से जुडने का निर्णय लिया है. इनमें प्रमुख हैं - इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बंगालुरू, एमिटी यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास, इग्नु, बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी, आईआईटी कानपुर आदि. अब तक अफ्रीका के करीब 1700 विद्यार्थियों ने ई-शिक्षा के लिए पंजीकरण किया है.
दूसरी तरफ ई-चिकित्सा के लिए भारत की 11 सुपर स्पेश्यालिटी अस्पतालों को अफ्रीका की 33 अस्पतालों से जोड़ा गया है. इसकी मदद से अफ्रीका की उन अस्पतालॉं के चिकित्सक तथा मरीज भारतीय डॉक्टरों से सलाह कर पाएंगे.
भारत की यह महत्वपूर्ण परियोजना अफ्रीका के आम लोगों के जीवन में बदलाव ला सकती है.

