आप सोच रहे होंगे - "आज पिज़्जा खाने कहाँ जाया जाए", और आप देखेंगे कि आपके पीसी [पर्सनल कम्प्यूटर] ने स्वत: ही गूगल के माध्यम से पिज्जा से संबंधित खोज नतीजे प्रस्तुत कर दिए हैं. यह सुनने में अविश्वसनीय लग सकता है परंतु यह असम्भव नहीं है. बल्कि इस तरह के कम्प्यूटर को विकसित करने का कार्य शुरू हो चुका है और शुरूआती सफलता भी हासिल हुई है. इंटेल के रिसर्च डिपार्टमेंट के वैज्ञानिक एक ऐसे भविष्य के कम्प्यूटर पर कार्य कर रहे हैं जो आपके दिमाग में चल रहे विचारों से संचालित होगा. उस कम्प्यूटर को निर्देश देने के लिए ना तो आपको माउस की जरूरत पडेगी, ना ही कीबॉर्ड की और ना ही कुछ बोलने की.
शुरूआती परीक्षणों से पता चला है कि इस तरह की कम्प्यूटर तकनीक विकसित की जा सकती है जिससे कम्प्यूटर इंसान के दिमाग के पैटर्न को पढकर यह जान जाए कि दिमाग में क्या चल रहा है. इसके लिए फिलहाल अस्पतालों में इस्तेमाल किए जाने वाले महंगे मैग्नेटिक रिज़ोनेंस स्कैनर का इस्तेमाल किया जाता है. परंतु भविष्य में एक हैडगीयर जितनी डिवाइज़ विकसित कर ली जाएगी जिसे हैडफोन की तरह पहना जा सकेगा और जिसके माध्यम से आपका पीसी आपके दिमाग तक पहुँच बना लेगा.
फिलहाल यह तकनीक काफी प्रारम्भिक अवस्था में है और दिमाग को एक निश्चित शब्द तक पहुँच बनाने में समय लग रहा है. उदाहरण के लिए जब आप पिज्जा शब्द सोचते हैं तो आपके दिमाग का भूख से सबंधित हिस्सा सक्रीय हो जाता है. इससे कम्प्यूटर समझ जाता है कि आप कुछ खाने के बारे में सोच रहे हैं. इसके बाद वह कई गणनाएँ कर पिज्जा तक पहुँचता है. यह जटील कार्य है और फिलहाल इसमें काफी समय भी लग रहा है. परंतु जैसे जैसे यह तकनीक विकसित होती जाएगी इस तरह की गणनाओं को करने का समय भी कम होता जाएगा.
फिलहाल एक शब्द तक पहुँचने के लिए ऐसा कम्प्यूटर सिस्टम 20 प्रकार के सवालों के दौर से गुजरता है. परंतु धीरे धीरे एक लाइब्रेरी बन जाने के बाद यह प्रक्रिया तेज हो जाएगी. वैज्ञानिक फिलहाल दिमाग की मैपिंग कर रहे हैं ताकी हमारे द्वारा बहुधा सोचे जाने वाले शब्दों की गणनाएँ तेज बन सके.
एक बार यह तकनीक विकसित हो जाने के बाद हम मात्र सोच कर ईमेल कर पाएंगे, चिट्ठियाँ लिख पाएंगे और हाँ गूगल खोज भी कर पाएंगे. बिना माउस या कीबोर्ड या आवाज का उपयोग किए.

