Wednesday, May 23rd

अंतिम अपडेट:04:05:04 AM IST

अब "टच" का है जमाना, परंतु क्या है भविष्य?

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touchscreenअमेरीका की वर्जीनिया कैम्बेल 99 वर्ष की हैं. उन्होनें अपनी जिंदगी में कभी एटीएम मशीन का इस्तेमाल नहीं किया. वे हमेशा नए और आधुनिक गैजेटों से दूर रही. परंतु उनके पोते-पोतियों ने जब उनको एपल का आईपैड दिखाया, तो वर्जीनिया ने थोड़ी ही देर में उस गैजेट का इस्तेमाल करना सीख लिया. आईपैड स्पर्श तकनीक पर आधारित गैजेट है और वर्जीनिया ने इसे ऑपरेट करना काफी सरल पाया.

सोनी ने बुधवार को अपने ई-रीडर की नई श्रृंखला जारी की है. सोनी ने अब ई-रीडर से बटन हटा दिए हैं और पूरा गैजेट अब टचस्क्रीन तकनीक पर आधारित है. इसे लॉंच करने से पहले सोनी ने व्यापक शोध की थी. सोनी के अधिकारियों के अनुसार कम्पनी ने देखा कि लोग बिना टचस्क्रीन वाले गैजेट की स्क्रीन पर भी उंगलियाँ लगाते हैं, क्योंकि उन्हें नैसर्गिक रूप से ऐसा आभास होता है कि वे स्पर्श के माध्यम से उस गैजेट को ओपरेट कर पाएंगे. लोगों को स्पर्श तकनीक पर आधारित गैजेट अधिक सरल लगते हैं.

तो क्या अब बटन, कीबॉर्ड या माउस की कोई आवश्यकता नहीं?

फिलहाल इनका उपयोग एकदम से बंद तो नहीं होगा परंतु कम जरूर हो जाएगा. लोग टचस्क्रीन आधारित गैजेटों को अधिक पसंद कर रहे हैं और एपल के उत्पादों ने इस मान्यता को बल ही दिया है. यहाँ तक की रिसर्च इन मोशन ने भी अब टचस्क्रीन ब्लैकबेरी लॉंच कर दिया है. इसके अलावा सोनी का टचस्क्रीन ई-रीडर आ चुका है और एमेजन अपने कींडल ई-रीडर का टचस्क्रीन संस्करण बना रहा है. स्वयं अमैज़न ने महसूस किया कि लोग कींडल की स्क्रीन पर भी उंगलियों की छाप छोड़ रहे हैं क्योंकि उनको लगता है कि ऐसा कर वे गैजेट ऑपरेट कर पाएंगे.

एटीएम मशीन बनाने वाली कम्पेनी डीबोल्ड का कहना है कि उनके द्वारा निर्मित 50% एटीएम मशीनें अब टचस्क्रीन होती हैं, क्योंकि आजकल बैंकें ऐसी ही एटीएम मशीनें लगवाना चाहती है, क्योंकि ग्राहकों को वह अधिक उपयोगी लगती है.

अब कई बुटिक, बार और फैशन हाउसों में टचस्क्रीन आधारित कैटेलोग देखे जा सकते हैं. लोग वहाँ जाते हैं और अपने मनपसंद कपड़ों या शराब को आसानी से चुन सकते हैं.

परंतु लोगों को टचस्क्रीन ही क्यों पसंद आती है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि टचस्क्रीन हम इंसानों के लिए नैसर्गिक रूप से प्रोग्राम तकनीक है. हम हमारी दैनिक कार्यकलापों के दौरान कई तरह की चीजों को छूते हैं और कई काम मात्र छूने से हो जाते हैं. चीजों को इधर उधर करना हो या हिलाना - डुलाना हो, यह सब कार्य उंगलियों के इशारों पर हो जाते हैं. इसके लिए किसी विधा को सीखने की आवश्यकता नहीं रहती. परंतु कीबोर्ड पर टाईप करना या माउस का इस्तेमाल करना सरल नहीं होता, इसे सीखना पड़ता है. जाहिर है इंसानों को टचस्क्रीन गैजेट पर उंगलियों से निर्देश देना अधिक सरल लगता है.

भविष्य:
परंतु भविष्य टचस्क्रीन भी नहीं है. भविष्य मे ऐसे गैजेट बनेंगे जिनको ओपरेट करने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी. वे आपकी पसंद - नापसंद को पहचानते होंगे. वे आपके हावभाव, हाथों के ईशारों और चेहरे के भावों को पढकर उस हिसाब से कार्य करेंगे. मन के भाव पढने वाले कम्पयूटर का विकास जारी है. भविष्य में शायद इंसान नहीं बल्कि कम्प्यूटर इंसानों को निर्देशित करेंगे. तब गूगल हम पर नहीं हम गूगल पर आधारित होंगे.
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