यह मशीनी हाथ बिल्कुल उसी तरह से काम करता है जैसे कोई प्राकृतिक हाथ करता है. इस हाथ की मदद से चीजें पकड़ी जा सकती है, सामान उठाया जा सकता है और हाँ इस हाथ में सवेंदनाएँ भी है. मतलब यह कि इस हाथ को धारण करने वाला व्यक्ति इसे महसूस कर सकता है.
तेल अवीव विश्वविद्यालय के योसी शासेम डायमंड और उनकी टीम द्वारा विकसित यह हाथ फिलहाल रोबिन एकेनस्टेम नामक व्यक्ति के शरीर के साथ जोड़ा गया है. इस हाथ की वायरिंग टूटे हुए हाथ के समीप स्थित नसों के साथ की गई है.
अब यह हाथ रोबिन के शरीर का एक हिस्सा बन चुका है और वह इसे महसूस कर सकता है. रोबिन इस हाथ की मदद से खाना खाते हैं और किसी चीज को छूकर उसे महसूस भी करते हैं.
इस हाथ को विकसित करने वाली टीम के एक सदस्य के अनुसार - हमारा लक्ष्य है न्यूरोसाइंस को नवीन प्राद्योगिकी के साथ जोड़ देना. भविष्य में ऐसे कृत्रिम हाथ बनेंगे जिनके लिए विशेष कोडिंग की आवश्यकता नही रहेगी.
बहरहाल रोबिन अपने कृत्रिम हाथ जो जब तक चाहें रख सकते हैं और वे इससे खुश भी हैं.

