घर में खाना पका कर खाया जाता है, रेस्तराँ में जाकर खाना खाया जाता, त्वरित पेट भरने के लिए फास्ट फूड भी खाया जाता है, और अब जल्द ही खाना 'प्रिंट" भी किया जा सकेगा.कोर्नेल विश्वविद्यालय, न्यूयार्क के वैज्ञानिकों ने एक अनोखी तकनीक विकसित की है, जिसकी मदद से खाने को त्रिआयामी स्वरूप में प्रिंट किया जा सकेगा. यह एक विशेष प्रिंटर है जिसके अंदर खाना बनाने में प्रयुक्त विभिन्न सामग्रियों को प्रवाही रूप में संग्रहित किया जाता है जो सिरींज के माध्यम से प्रिंट होती रहती है.
Fab@home नामक इस प्रोजेक्ट की एक बडी विशेषता यह है कि यह ओपन सोर्स प्रोजेक्ट है, यानी कि कोई भी इस तकनीक को आगे बढा सकता है, परिवर्तित कर सकता है और इसका व्यवसायिक उपयोग भी कर सकता है.
इस प्रिंटर में विभिन्न सामग्रियों को भरा जाता है और उसके बाद इसमें फैबऐप इंस्टाल की जाती है. फैबऐप यानी कि खाने की विधि. उस विधि के हिसाब से यह प्रिंटर विभिन्न सामग्रियों को उचित अनुपात में छोडता है और व्यंजन का आकार बनने लगता है.
फैबऐप यह तय करता है कि किस सामग्री को किस अनुपात में और कब प्रवाहित करना है. इसकी ब्लूप्रिंट कैड डिजाइन की तरह होती है जहाँ व्यंजन का त्रिआयामी स्वरूप कम्प्यूटर पर तैयार होता है.
इस विधि का उपयोग चिकित्सकीय क्षैत्र में काफी अच्छी तरह से हो सकता है, क्योंकि इसकी मदद से चिकित्सक अपने मरीज को उचित अनुपात में सही पोषणयुक्त आहार तैयार करवा कर दे पाएंगे. इसकी मदद से आहार के रंग-रूप और अन्य परिमाणों को सटीकता से बदला जा सकेगा.
फिलहाल इस तकनीक के माध्यम से उसी प्रकार के व्यंजन बन सकते हैं जिनको बनाने में प्रयुक्त सामग्रियाँ प्रवाही स्वरूप में सिरींज से बाहर आ सके. परन्तु इस प्रोजेक्ट से जुडी टीम इस तकनीक को और परिष्कृत कर उसे हर प्रकार के व्यंजन बनाने लायक बना रही है.

