यह एक नई तकनीक है, जिसका उपयोग कर सुरक्षा एजेंसियाँ अपराधियों तक तेजी से पहुँच पाएगी, फोरेंसिक जाँच काफी आसान हो सकेगी, जिनेटिक खामियों का पता तेजी से चल सकेगा और हर कोई घर बैठे जिनेटिक टेस्ट कर पाएगा.बंगालुरू के इंस्टिट्यूट ऑफ बायोइंफोर्मेटिक्स एंड अप्लायड बायोटेक्नोलोजी के रजनीकांत वांगला और उनके अधिनस्थ पाँच सदस्य टीम ने एक मोबाइल फोन डिवाइज़ जितना बडा गैजेट बनाया है जिसकी मदद से फोरेंसिक जाँच हाल में उपलब्ध तकनीक की अपेक्षा ना केवल तेजी से हो सकेगी बल्कि खर्च भी 10 से 20 गुना कम आएगा.
हाल में उपलब्ध तकनीक के माध्यम से फोरेंसिक जाँच करने के लिए जटिल संसाधनों का उपयोग किया जाता है जिनका उपयोग केवल प्रशिक्षित व्यक्ति ही कर पाता है और जिनके माध्यम से जिनेटिक जाँच करने में कई घंटों का समय लग जाता है. परंतु यह नई तकनीक इस प्रकार की जाँच को आम जाँच बना देती है.
वांगला के अनुसार इस गैजेट के माध्यम से किसी प्रकार की जिनेटिक जाँच जैसे कि अपराध निरोधी फोरेंसिक जाँच, एचआईवी और कैंसर की जाँच, अल्ज़ायमर की जाँच या ब्रैन ट्यूमर की जाँच मात्र 15-20 मिनट मे ही हो जाएगी.
फिलहाल उपलब्ध संसाधनों की मदद से इस प्रकार की जाँच करने का खर्च 5000 रूपए तक आता है परंतु इस डिवाइज़ से यही जाँच 150 रूपए में ही हो जाएगी. परंतु उसके लिए इस गैजेट को अभी और परिष्कृत किया जाना है. इसको तैयार कर रही टीम का मानना है कि आगामी कुछ वर्षों के भीतर यह गैजेट बाज़ार में उपलब्ध हो जाएगा.

