आईफोन, आईपोड और मैक कम्प्यूटर बनाने वाली प्रसिद्ध कम्पनी एपल की अगली बडी परियोजना एक ऐसी 3डी तकनीक विकसित करना हो सकती है जिसके माध्यम से होलोग्राफिक फिल्में देखना भी सम्भव हो. इस नई तकनीक के माध्यम से 3डी फिल्में देखने के लिए विशेष 3डी चश्मे पहनने की आवश्यकता नहीं पडेगी और यही इसकी सबसे बडी विशेषता भी होगी.वैसे कुछ अन्य कम्पनियाँ भी इस दिशा में काम कर रही है और कुछ ऐसी 3डी टीवी मॉडल भी बाज़ार में आए हैं जिन पर आ रही 3डी तस्वीरों को देखने के लिए विशेष चश्मों की आवश्यकता नहीं पडती. परंतु अभी तक ऐसे टीवी सेट सफल नहीं हुए हैं.
अन्य 3डी तकनीकों में दर्शकों को पर्दे पर दिख रही तस्वीरों को ठीक से देखने के लिए विशेष पोलराइड चश्मे पहनने पडते हैं जो दायीं आँख और बायीं आँख को थोडे अलग चित्र दिखाते हैं जिससे दिमाग में वे चित्र मिलकर गहराई का प्रभाव पैदा करते हैं.
परंतु एपल की तकनीक अलग है. यहाँ चश्मों की बजाय जिस स्क्रीन पर 3डी चित्र दिखाए जाने हैं उस पर अधिक ध्यान दिया गया है. यह विशेष स्क्रीन अत्यंत छोटे और गोलाकार पिक्सल से बनी है जो बायीं और दायीं आँख को दो अगल चित्र दिखाती है. इससे एक स्टिरीयोस्कोपिक चित्र तैयार होता है जो हमें 3डी दिखाई देता है.
एपल की इस तकनीक को हाल में पैटेंट मिला है. परंतु एपल का इरादा इससे भी आगे जाकर होलोग्राफिक फिल्में देखना सम्भव बनाना है. इसका अर्थ यह है कि यह तकनीक कई सारे लोगों और उनकी आँखों की स्थिति पर नजर रख सकती है और उसके हिसाब से चित्रों में परिवर्तन कर सकती है, इससे चित्र हमेशा स्पष्ट बने रहते हैं भले ही आप फिल्म के एक कोने को ही क्यों ना देख रहे हों.
पर इस तकनीक के माध्यम से फिल्में दिखाने के लिए फिल्म निर्माताओं को भी तैयार होना पडेगा क्योंकि वर्तमान तकनीक से इस तरह की फिल्में नहीं बन सकती और इसलिए फिल्म निर्माण के नए संसाधन भी विकसित करने होंगे.
एपल की परियोजना महत्वाकांक्षी है परंतु भविष्य में यह काफी उपयोगी साबित हो सकती है.

