आज नए वर्ष की पहली सुबह है और हम उम्मीद कर सकते हैं कि नया वर्ष हम सब के लिए अपार खुशियाँ लेकर आए. दुनिया में दिन प्रतिदिन नई नई खोजें और नई नई तकनीकों पर शोध कार्य चल रहे हैं. इस वर्ष कई ऐसी तकनीकें प्रकाश में आएंगी अथवा जिनका प्रचलन बढेगा जिनकी वजह से हमारी जिंदगी और भी आसान बनेगी.स्टेम सेल से बनी दवाईयाँ:
उम्मीद कर सकते हैं कि इस वर्ष इंसान के स्टेम सेल से बनी दवाईयाँ बाज़ार में उपलब्ध हो जाएँ. इससे हृदय रोग जैसी कई प्राणघातक बीमारियों से लोगों को राहत मिलेगी. इस तरह की दवाईयाँ अमेरिका में उपलब्ध है.
हवा से चलने वाली कार:
दुनिया की सबसे सस्ती कार "नैनो' बनाने के बाद टाटा मोटर्स का आगामी लक्ष्य है कम्प्रेस्ड हवा से कार चलाना. यह कार बिल्कुल प्रदुषण मुक्त होगी और इसकी रफ्तार भी 100 किमी प्रतिघंटा से अधिक होगी. इस कार से सफर करने का खर्च प्रति किमी 30 पैसा के आसपास आएगा. यह कार इस वर्ष बाजार में आ जाएगी यह उम्मीद करना बेमानी है पर इसका प्रोटोटाइप तैयार हो सकता है.
नया प्रोसेसर:
इंटेल का सेंडीब्रिज माइक्रोप्रोसेसर इस वर्ष बाजार में आ जाएगा. नैनो तकनीक पर आधारित इस माइक्रोप्रोसेसर में 32 नैनोमीटर के असंख्य ट्रांजिस्टर लगे हैं. इसकी वजह से कम्प्यूटिंग की रफ्तार बेहद तेज हो जाएगी.
ग्रहों का अभ्यास:
दो जीएसएलवी रोकेटों की निष्फलता के बावजूद इस वर्ष इसरो ग्रहों और तारों का अभ्यास करने के लिए नए उपग्रह एस्ट्रोसेट का प्रक्षेपण कर सकता है. इसरो ने आज तक संचार संबंधित अनेक उपग्रह बनाए हैं परंतु ग्रहों का अभ्यास करने के लिए बना यह पहला उपग्रह है. 1650 किलो वजन का यह उपग्रह प्रतिदिन 420 जीबी डेटा भेजेगा.
नए मोबाइल:
मोबाइल फोन को अब स्मार्ट फोन कहा जाने लगा है क्योंकि उनका दायरा केवल बातचीत तक ही सीमित नहीं रहा है. अब आगे क्या? मोबाइल अब स्टेथोस्कोप की तरह धडकन की जाँच करेंगे, रक्तचाप मापेंगे, बुखार की जाँच करेंगे. आपके आहार पर नजर रखेंगे. आपके जासूस की तरह काम करेंगे और वह सबकुछ जो आप सोच सकते हैं.
अबाधित बिजली:
नहीं सरकार यह कार्य नहीं करने जा रही है परंतु पेनासोनिक एक नई लीथियम-आयन आधारित बैटरी लेकर आ रही है जो पूरे घर को 1 सप्ताह तक प्रकाशित रख सकती है. फिलहाल उपलब्ध इनवर्टर 4-5 घंटों तक बिजली उपलब्ध करवा पाते हैं. पेनासोनिक की नई बैटरी परम्परागत बैटरियों के मुकाबले 20 गुना अधिक ऊर्जा का संग्रह कर सकती है.
रोबोट - इंसान की घटती दुरियाँ:
कई ऐसे रोबोट बन चुके हैं जो अब मानव और रोबोट के बीच की दुरियों को कम कर रहे हैं. अब ऐसे रोबोट बन चुके हैं जो व्यक्ति की सवेंदनाओं को समझ सके और प्रतिउत्तर दे सके. 2011 में ऐसे कई अन्य रोबोट तैयार होंगे. वास्तव में इंसान रोबोट और रोबोट इंसान बनते जा रहे हैं.

