फिलहाल इसकी कल्पना मुश्किल लग सकता है परंतु इंटरनेट से अंग्रेजी का प्रभुत्व खत्म होगा और चीन की राष्ट्रीय भाषा इंटरनेट की सबसे लोकप्रिय भाषा बन जाएगी. और यह सम्भव हो जाएगा आगामी पाँच वर्ष के भीतर.चीनी भाषा में बने वेबपन्नों की संख्या तेजी से बढ रही है और उसी तेजी से बढ रहे हैं ऐसे प्रयोक्ताओं की संख्या जो अपनी पहली भाषा के तौर पर चीनी भाषा को चुनते है. इंटरनेट वर्ल्ड स्टेट्स के आँकडों के अनुसार चीन ने पिछले वर्ष 3.6 करोड नए इंटरनेट प्रयोक्ता जोडे. इस तरह से चीन के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या अब 44 करोड तक पहुँच गई है. दूसरी तरफ अमेरिका के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 22 करोड ही है.
अंग्रेजी का उपयोग करने वाले लोग ना केवल अमेरिका बल्कि यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी हैं. परंतु फिर भी वैश्विक आँकडों पर गौर करें तो भी अंग्रेजी के उपयोगकर्ताओं की संख्या 53.7 करोड ही है. दूसरी तरफ चीनी भाषा के उपयोगकर्ताओ की संख्या 44 करोड है.
एक और तथ्य यह है कि दुनिया भर में इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोगों का 42% अंग्रेजी भाषी है, और इतना ही प्रतिशत चीनी भाषी भी है. इस तरह से इंटरनेट पर चीनी भाषा के और विकसित होनी की पूरी सम्भावना है.
इसके लिए चीन की कुछ नीतियाँ भी जिम्मेदार हैं. चीन में लोगों को इंटरनेट की शिक्षा दी जा रही है और उन्हें इसका उपयोग करने के लिए एक तरह से बाध्य किया जा रहा है. चीनी संचार मंत्रालय ने मीडिया के लिए नियम बनाया है कि उन्हें चीनी के इतर अन्य भाषाओं के शब्दों का कम से कम उपयोग करना होगा और यदि करे तो भी साथ चीनी भाषा में अनुवाद देना होगा.
चीन का इरादा अब इंटरनेट पर भी अपना प्रभुत्व स्थापित करना है. उसका मुकाबला करने के लिए भारत की कोई तैयारी नहीं है. इंटरनेट की शीर्ष 10 भाषाओं में भी हिन्दी को कोई स्थान नहीं मिलता है.

