चीन की राजधानी बिजिंग के पास इस किसान का खेत है. उन्होनें प्राथमिक स्कूल तक ही पढाई की है, लेकिन उन्होनें ना केवल अनगिनत रोबोट बनाए हैं बल्कि होंडा के आसिमो ह्यूमनोइड रोबोट की तर्ज पर एक ह्यूमनोइड रोबोट भी विकसित किया है जो उसके लिए रिक्शा खिंचता है. यकीन करना मुश्किल हो रहा है? यह सच है. वु यूलु 49 वर्ष के हैं और उन्हें रोबोटिक तकनीक का उस्ताद माना जाता है. हालाँकि उनके पास किसी टेक्नोलोजी इंस्टिट्यूट की कोई डिग्री नहीं है, बल्कि उन्होनें तो कभी प्राथमिक स्कूल से आगे जाने की सोची भी नहीं थी. परंतु आज उनका नाम चीन के बच्चे बच्चे को पता है और इसके पीछे वजह है वु के द्वारा निर्मित क्रांतिकारी रोबोट जो ना केवल उपयोगी हैं बल्कि बेहद कम खर्चीले भी. यही वजह है कि आज उनके द्वारा बनाए गए रोबोट की जाँच करने विशेषज्ञ स्वयं उनके पास जाते हैं.
वु ने आज तक 50 से अधिक रोबोट बना लिए हैं. ये रोबोट उनके लिए चाय परोसते हैं, सिगरेट जलाकर देते हैं, तस्वीरें पेंट करते हैं, और एक ह्यूमनोइड रोबोट अपने मालिक को रिक्शे में बिठाकर खींचता भी है.
वु को बचपन से ही रोबोट बनाने में रूचि थी. वे अपने पिता के खेत में काम किया करते थे. आज से 20 वर्ष पहले उन्होने अपना पहला रोबोट बनाना शुरू किया. उनके पास ना तो अत्याधुनिक सयंत्र थे ना ही पैसे. परंतु उन्होनें जो हाथ लगा उसी से काम चला लिया. उन्होनें एक पुरानी साइकल को तोड़मोड़ कर फसल काटने वाली मशीन बना ली. यह उनका पहला रोबोट था और उसके बाद साल दर साल वे कुछ ना कुछ परिष्कृत और नया करते रहे.
वु एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और अपने रोबोटिक जुनून की उन्होनें बड़ी कीमत चुकाई है. पैसे के अभाव में उनका घर गिरवी हो गया और उनकी पत्नी ने भी आर्थिक हालात से तंग आकर तलाक देने की धमकी भी दे दी. परंतु इससे वु पर कोई असर नहीं पड़ा. रोबोट उनकी पहली रूचि बने रहे.
वु के लिए दुर्भाग्य की बात यह रही कि उनके पास हमेशा पैसों की तंगी रही और उनको जन्म भी चीन में हुआ. इसलिए इतने वर्षों तक उनके कार्यकलापों के विषय में बाहरी दुनिया को कुछ भी पता नहीं चला. लेकिन अब उनकी ख्याति दुनिया भर में फैल रही है और कई संस्थाएँ उनकी मदद के लिए आगे आ रही हैं.
वु मई से शंघाई में शुरू हो रहे वर्ल्ड एक्स्पो में भी भाग लेने वाले हैं. वु के अनुसार - अब मुझे दुनिया भर में जाना जा रहा है. मैं दुनिया भर के किसानों का प्रतिनिधि हूँ. यह मेरे लिए गौरव की बात है.

