मानवरहित खोजी विमान बनाने के क्षैत्र में विश्व काफी बढ चुका है. भारत के पास भी इस तरह का स्वदेशी विमान है. लेकिन इसकी अपनी सीमाएँ हैं. इस तरह का विमान सुदूर गुफाओं, घने जंगलों और इमारतों के अंदर घुसकर जासूसी करने में नाकाम रहता है. इसकी वजह है इस तरह के यानों का बड़ा कद और सपाट उड़ान भर सकने की क्षमता. इसलिए वैज्ञानिक अब इस तरह के जासूसी उपकरण बनाना चाह रहे हैं जो कद में एकदम छोटें हों लेकिन बहुत ही कार्यकुशल हो. ये यान हवा में स्थिर रह पाएंगे, सीधे उड़ान भर पाएंगे, तेजी से ऊपर या नीचे उड़ सकेंगे और पलक झपकते ही किसी की भी आँखों के आगे से ओझल हो जाएंगे.
लेकिन ऐसा हो कैसे?
एक छोटा सा पक्षी वैज्ञानिकों को प्रेरित कर रहा है और यह पक्षी है – हमिंगबर्ड. हमिंगबर्ड की उड़ान भरने और हवा में स्थिर रहकर फूलों का रस चूसने की क्षमता हमेशा से आकर्षण का केन्द्र रही है.
हमिंगबर्ड के शरीर की रचना और उसके द्वारा विशेष रूप से अपने पंखों को फड़फड़ाने से वह ऐसा कर पाता है. दरअसल जब हमिंगबर्ड उड़ान भरता है तो उसके नीचे चक्रवात की सी स्थिति पैदा हो जाती है जो उसे तेजी से हवा में उठा सकती है, तथा इसी की वजह से वह हवा में स्थिर भी रह जाता है.
यह कुछ कुछ वैसा ही प्रभाव है, जब पानी में भँवर बनता है और नाव उसमें खींची चली जाती है. इसीका उल्टा प्रभाव हमिंगबर्ड को हवा में ऊपर उठाता है.
अमेरिका की बफैलो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हमिंगबर्ड की उड़ान का अभ्यास किया. इसके लिए उन्होने हमिंगबर्ड को हिलीयम भरे वातावरण में उड़ने के लिए प्रशिक्षित किया और उसकी उड़ान से बनने वाले चक्रवात का अभ्यास किया.
अब वैज्ञानिक ऐसे यंत्र बना रहे हैं जो हमिंगबर्ड की तरह ही अपने फ्लेप हिलाकर वैसा ही प्रभाव पैदा कर सकते हैं. यह प्रयोग जब कामयाब हो जाएगा तब इस तरह के आधुनिक जासूसी उपकरण तैयार होंगे जो दिखने में छोटे और बहुत ही सक्षम होंगे.

