Tuesday, February 21, 2006

मुझे लता और आशा पसंद नहि तो?

इस देश मै अगर आपको खुदको एक सहि संगीत प्रेमी साबित करना है तो आपको लता मंगेश्कर का फेन होना ही पडेगा लता, मुकेश, रफी, आशा यह सब महान गायक है और कुछ् लोगो का मानना है कि आज काल के गायको को इनके जैसा गाना नहि आता इसिलिये इन्हे हंमेशा रफी के ही गाने पसंद आते है ये लोग अपने जमाने मे ही खोये हुए रहते है क्योकि वो मानसिक रुप से बुढे हो चुके होते है अरे अगर मुझे लता मंगेशकर से ज्यादा श्रेया घोषाल और आशा भोंसले से ज्यादा सुनिधि चौहान के गाने पसंद आये तो क्या गलत है? बस मिल गया बडो से लेक्चर! "इसे लता के गाने नहि पसंद्!" जेसे मै कोई दुसरी दुनिया से आया हुआ एलियन हूं!

अरे यार, होंगे तुम्हारे जमाने के गीत अछ्छे , इसिलिये तो उनमे से रिमिक्स बनते है अगर हम आपके जमाने के गानो कि तारिफ करके उसमे से नया रिमिक्स बनाते है तो क्या गलत है? अब इतना भी मत इतराईये, यह रिमिक्स आपके जमाने के गानो का नहि, दरअसल वो गाने के बोल का होता है रिमिक्स यानि पुरानी शराब नयी बोटल मे नहि, क्योकि यहा तो गाने के बोल से लेकर संगीत और गायक सब अलग है, सिर्फ थोडी बहुत साम्यता है गाने के बोल मे भी अंग्रेजी शब्द है यानि पुरा का पुरा नया गाना बन गया है तो इसमे भी बहुत महेनत होती है लेकिन मानसिक बुढे लोगो को इसमे कोइ महेनत नहि लगती, सिर्फ चोरी लगती है! अरे भाई, नये गाने का भी रिमिक्स बनाते है हम् सिर्फ आपके जमाने के गानो का हि नहि

मेरा मानना है कि सुनिधि मे आशा से ज्यादा क्षमता है अभी तो वो बहुत छोटी है आशा की उम्र तक पहुंचने मे बहुत समय है आज कल आपके जमाने कि तरह नहि है कि १०-१२ गायक ज्यादा गाते थे Indian Idol जेसी स्पर्धाओ कि बजह से टककर कडी हो गयी है फिर भी टिकना है
अब ये बच्ची श्रेया घोषाल का गाना सुनिये देवदास और परिणिता मे क्या गाने गाये है! क्या वह थोडे सालो मे लता को टक्कर देने वाली बडी अमर गायिका नहि बनेंगी? बेशक बनेंगी यह नोट करले कि इन दोनो गायिका कि मनपसंद गायिका लता और आशा है

हथौडा
वेसे अगर आपके जमाने कि बात करे तो भी लता से बहेतर बहुत सी गायिकाए होन्गी लेकिन आपकि कमझोर संगीत सुझ कि बजह से वह आपको दिखी नहि! शायद आप पोप्युलर गाने हि सुनते थे इसिलिये शमशाद बेगम को भुल गये शायद लताजी फिल्मो मे राजनिति करती थी और इसिलिये कोई और आपके जमाने मे से उभर नहि पाया? मुझे अफसोस होता है कि आप लोगो ने केवल २-३ "अछ्छी" गायिकाए दी!

4 Comments:

At 2/21/2006 5:07 AM , Blogger Pankaj Bengani said...

अगर राजश्री बैनर की पुरानी फिल्मों के गाने सुने तो काफी अच्छी आवाज सुनने को मिलती है. नही लता की नही है. एक गुमनाम गायिका की है. और उसने काफी अच्छा गला पाया था. पर कभी उपर ना आ सकी.

 
At 2/21/2006 5:04 PM , Blogger jai hanuman said...

ये लता आशा वगैरह की कहानी नेतागिरी की है। जब लता जी छोटी थीं तो ये भी दूसरों की नकल करती थीँ। अब जब ताकत आ गयी हाथ में तो सुना है कइयों का कैरियर बरबाद किया इन्होंने।

जैसा संजीव कुमार ने कहा था अंगूर फिल्म में "ये सब गैंग के आदमी हैं" ।

हुनर की कोइ कमी नहीं भारत में। कमी है तो ढाँचे की जो बीज को सहारा दे सके पेड़ बनने तक।

 
At 3/27/2006 3:51 AM , Blogger Sagar Chand Nahar said...

रवि भाई
एक बार फ़िर आपको कुछ कहना पड रहा है , दर असल आपको नाराज़गी है किससे? लता ओर आशा से या उनके गानो से ? बेशक सुनिधी ओर श्रेया अच्छी गायिकायें है. परन्तु अभी परिपक्वता की कमी है जो समय पुरा कर ही देगी परन्तु कोइ किसी कि बराबरी नही कर सकता क्युं कि हर एक की अपनी अपनी शैली है गाने की, ना श्रेया लता जी को टक्कर दे सकती है ना ही सुनिधी आशा जी को, ओर तो ओर उन दोनो ने तो सपने भी नही सोचा होग कि वे लता, आशा को टक्कर देगी भी ये तो आपकी सोच है.
एसा नही है कि लता ओर आशा ने गाये वे सारे गाने अच्छे ही है, उन्होने भी कई बेसुरे गाने आये है तो सुनिधी, श्रेया ने भी हमारा काम है जो अच्छा है उसे सुने.
मे यह दो चार गानो के बोल लिख रहा हुं गायिकाओं के तो शायद नाम भी आपने नही सुने होंगे, संभव हो तो कहीं से गाने सुनो फ़िर उनको कोसो. कुछ गाने लता जी के भी है.
हमारे बाद अब महफ़िल मे अफ़साने बयां होंगे - बागी - लताजी - मदन मोहन
पपीहा रे मेरे पिया से कहियो - किस्मत- पारुल घोष - अनिल विश्वास
बेकरार है कोइ आ मेरे दिलदार आ - शमा परवाना - मो. रफ़ी, सुरैया
आ इन्तज़ार है तेरा -बडी मां - नूर जहां -के दत्ता
मुझको अपने गले लगा लो- मुबारक बेगम
कभी तन्हाइयों में - मुबारक बेगम- हमारी याद आयेगी
...............अभी इतना कफ़ी है बाकी ओर कभी
::सागर चन्द नाहर ::

 
At 10/16/2007 12:57 AM , Anonymous Anonymous said...

aapke har lekh me SIRF AUR SIRF har purani baton/ chizon ki kat hai , aisa lagta hai ki aap apne ghar/samaj/desh/duniya sabse ukataye hue hain...jyada bolne se, sunna aur samjhna bhi bahut zaruri hai. HAR BAT BADE BUDHON KI GALAT NAHI HOTI. ( FYI im 32yrs old )aur mai ye manti hu ki unki koi bhi bat galat nahi hoti.Sirf unki aur hamari aaj ki duniya ko dekhne samjhne ke nazariye me fark hai,HAME UNHE SAMJHNA AUR SAMJHANA HOGA , LEKIN AGAR YE KAM NAHI KAR SAKTE TO KAM SE KAM UNHE "SIRF GALAT" BOLNA BHI CHHODNA CHAHIYE.

 

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